

Sheikh Hasina Bangladesh Return: भारत में लंबे समय से निर्वासन में रह रही बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने वतन वापसी का बड़ा दावा किया है। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि इसी साल वह बांग्लादेश वापस जाएंगी। उन्होंने बताया कि इस वापसी में उनकी कोई व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा नहीं है। वे बांग्लादेश में कानून के शासन, लोकतंत्र और लोगों के राजनीतिक अधिकार की बहाली के लिए वापस जाएंगी। इंटरव्यू के दौरान हसीना ने बांग्लादेश में उनकी पार्टी अवामी लीग पर लगे प्रतिबंधों, अंतरिम सरकार, बांग्लादेश की राजनीति, अपने खिलाफ मौत की सजा, देश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों और भारत में निर्वासन पर विस्तार से बात की है।
शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के एक्स हैंडल पर बांग्लादेश वापसी की जानकारी देते हुए पोस्ट किया गया। पोस्ट में लिखा कि पार्टी के 77वें साल पर हमारे नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों के लिए मेरा संदेश साफ है। एकजुट रहें और लोगों के साथ खड़े रहें। हर गांव, हर मोहल्ले, हर वार्ड और हर यूनियन में लोगों के साथ अपने रिश्ते को मजबूत करें। सताए हुए लोगों का साथ दें।
आगे उन्होंने लिखा कि अल्पसंख्यकों, महिलाओं, बच्चों, मेहनतकश लोगों, गरीबों और हाशिए पर रहने वाले लोगों की सुरक्षा और सम्मान के मामले में कोई समझौता न करें। अवामी लीग की राजनीति बदले की भावना वाली नहीं है। यह अधिकारों, सुरक्षा, सम्मान और विकास की राजनीति है। अवामी लीग लोगों के साथ थी, लोगों के साथ है और लोगों के साथ रहेगी। लोगों की ताकत से अवामी लीग फिर से आगे बढ़ेगी।
मौत की सजा पर शेख हसीना ने बताया कि वे मौत से नहीं डरतीं। उन्होंने बताया कि 1975 में मैंने अपना परिवार खोया है। मुझ पर भी 21 अगस्त को ग्रेनेड से हमला हुआ था। मेरे खिलाफ कई बार साजिश रची गईं, फिर भी मैं लोगों के साथ खड़ी रही। बांग्लादेश की जनता ने मुझे 5 बार देश का प्रधानमंत्री चुना। अपने कार्यकाल में मैंने देश के विकास के लिए बहुत काम किया।
इंटरव्यू में शेख हसीना ने बताया कि उनके खिलाफ कोर्ट से जो फैसला आया था, वह राजनीतिक बदले की भावना से किया गया था। उन्होंने इसे अवामी लीग पार्टी को कमजोर करने और नेतृत्व खत्म करने की साजिश बताया। बांग्लादेश सरकार की मौजूदा व्यवस्था पर भी शेख हसीना ने कई सवाल खड़े किए। हसीना ने सरकार पर आरोप लगाया कि देश का लोकतंत्र कमजोर हो गया है। वहां आम लोगों की सुरक्षा खतरे में है। कानून का शासन नहीं है।
देश की अर्थव्यवस्था भी कमजोर हुई है। इस दौरान पूरे देश में अल्पसंख्यकों पर लगातेर हमले बढ़े हैं। उन्होंने बताया कि अवामी लीग के कार्यकर्ताओं और नेताओं पर कार्रवाई की गई। उन्हें राजनीतिक प्रतिशोध के तहत प्रताड़ित किया गया।