

Saudi UAE Relations Forget Enmity Show Signs Of Thaw In Ties: मध्य पूर्व के दो शक्तिशाली देशों, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के बीच चल रहा मनमुटाव अब खत्म हो रहा है। दोनों के बीच जमे हुए रिश्तों की बर्फ आपसी बातचीत से तेजी से पिघलती हुई नजर आ रही है। दोनों देशों के नेताओं ने सुधरते रिश्तों का सकारात्मक संदेश दुनिया को दिया है।
सऊदी अरब के मीडिया मंत्री सलमान अल-दोसरी और UAE मीडिया अथॉरिटी के अध्यक्ष अब्दुल्ला बिन मोहम्मद ने अहम कदम उठाए हैं। रियाद समय के अनुसार शाम 7 बजे दोनों अधिकारियों ने एक ही समय पर एक्स पर बेहद मिलते-जुलते प्यार भरे संदेश साझा किए। इन संदेशों के जरिए मीडिया से आपसी तनाव बढ़ाने वाली नकारात्मक खबरों से बचने की विशेष अपील की गई है।
वरिष्ठ अधिकारियों ने सोशल मीडिया पोस्ट में दोनों देशों के बीच सदियों पुराने गहरे भाईचारे और साझा इतिहास की जमकर तारीफ की है। सबसे ज्यादा चर्चा उस खास तस्वीर की हो रही है जो पोस्ट्स के साथ शेयर की गई है। तस्वीर में सऊदी रक्षा मंत्री खालिद बिन-सलमान और UAE उपराष्ट्रपति शेख मंसूर बिन जायद मुस्कुरा रहे हैं।
खालिद बिन-सलमान असल में सऊदी अरब के ताकतवर क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के छोटे भाई हैं, जिससे तस्वीर की अहमियत ज्यादा है। इस तस्वीर ने विश्लेषकों को साफ संदेश दे दिया है कि दोनों की पुरानी दुश्मनी खत्म हो रही है। दोनों देशों ने अपने मतभेदों को पीछे छोड़ने की शानदार शुरुआत कर दी है।
सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ऐतिहासिक रूप से बहुत करीबी सहयोगी रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ महीनों में दूरियां बढ़ी थीं। सऊदी अरब यमन में हूती विद्रोहियों से अपनी सुरक्षा को पहली प्राथमिकता मानता है। वहीं, UAE यमन के दक्षिणी क्षेत्र में सक्रिय अपने खास सहयोगी गुटों को पूरी तरह से खुला समर्थन देता आया है।
यमन में हितों के टकराव के चलते दोनों देशों के बीच भारी और गंभीर सैन्य गतिरोध की स्थिति पैदा हो गई थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल उत्पादन के अहम कोटे को लेकर भी दोनों के कड़े रुख में दरार दिखी थी। मिडिल ईस्ट में राजनीतिक रूप से बड़ा भाई बनने की होड़ ने भी कड़वाहट काफी बढ़ाई थी।
तनाव इतना बढ़ गया था कि यमन में UAE समर्थित गुटों के हथियारों पर सऊदी अरब ने भीषण एयरस्ट्राइक तक कर दी थी। अब दोनों का एक साथ आना खाड़ी क्षेत्र की शांति और ऊर्जा बाजार की स्थिरता के लिए अहम है। दोनों मुल्क मध्य पूर्व की राजनीति में अपनी बहुत ही अहम और निर्णायक भूमिका निभाते हैं।