

Saudi Arabia Execution In Drug Trafficking: सऊदी अरब में मानवाधिकारों और मौत की सजा को लेकर एक बार फिर वैश्विक स्तर पर बहस छिड़ गई है। साल 2026 के अभी छह महीने भी पूरे नहीं हुए हैं और इस खाड़ी देश ने फांसी देने का 'शतक' पूरा कर लिया है।
मंगलवार, 23 जून 2026 को सात और अपराधियों को मौत के घाट उतारे जाने के साथ ही इस साल फांसी पाने वालों की कुल संख्या 100 तक पहुंच गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इन सजाओं में सबसे बड़ा हिस्सा ड्रग्स तस्करी से जुड़े अपराधियों का है।
सऊदी अरब के गृह मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार को जिन सात लोगों को फांसी दी गई, उनमें से पांच लोग ड्रग्स की तस्करी के मामले में दोषी पाए गए थे। न्यूज एजेंसी AFP द्वारा सरकारी घोषणाओं के आधार पर की गई गणना बताती है कि सऊदी प्रशासन सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर बेहद कड़े कदम उठा रहा है। गौरतलब है कि सऊदी अरब ने करीब तीन साल की रोक के बाद 2022 के आखिर में ड्रग्स से जुड़े अपराधों के लिए फिर से मौत की सजा लागू की थी।
इस साल अब तक दी गई 100 फांसियों में विदेशी नागरिकों की संख्या काफी अधिक है। आंकड़ों के मुताबिक, फांसी पाने वालों में 48 सऊदी नागरिक हैं, जबकि बाकी 52 विदेशी नागरिक हैं। इनमें 12 इथियोपियाई, 7 पाकिस्तानी, 6 सूडानी, 4 यमनी और 4 सीरियाई नागरिक शामिल हैं। साल 2026 में अब तक ड्रग्स से जुड़े अपराधों में फांसी पाने वालों की कुल संख्या 65 हो गई है। यह आंकड़ा इसलिए भी डरावना है क्योंकि पिछले साल (2025) में सऊदी अरब ने कुल 356 लोगों को फांसी दी थी, जो 1990 के बाद का सबसे बड़ा आंकड़ा था।
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इस स्थिति को 'डरावना पड़ाव' करार दिया है। संगठन का आरोप है कि सऊदी अधिकारी मौत की सजा का अनुचित और गैरकानूनी इस्तेमाल कर रहे हैं। एमनेस्टी के अनुसार, कई मामलों में विदेशी नागरिकों के खिलाफ चलाए गए मुकदमे पारदर्शी नहीं थे।
रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि खमीस मुशैत हिरासत केंद्र में बंद कम से कम 63 इथियोपियाई नागरिकों पर भी जल्द फांसी दिए जाने का खतरा मंडरा रहा है।
वैश्विक स्तर पर सबसे ज्यादा फांसी देने वाले देशों की सूची में सऊदी अरब वर्तमान में चीन और ईरान के बाद तीसरे स्थान पर है। जहां एक ओर मानवाधिकार संगठन इसे देश की आधुनिक छवि के विपरीत बताते हैं, वहीं सऊदी अधिकारियों का तर्क है कि कानून व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा के लिए ऐसी कड़ी सजाएं अनिवार्य हैं।