

Russian Ukraine War Statistics: यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में रूस को अब तक का सबसे बड़ा नुकसान हुआ है। यूक्रेनी सेना के जनरल स्टाफ के अनुसार, फरवरी 2022 से अब तक रूस ने अपने लाखों सैनिकों को खो दिया है, जिससे रूसी सैन्य नेतृत्व काफी चिंता में है।
यूक्रेन के जनरल स्टाफ की यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब पूर्वी मोर्चे पर दोनों देशों के बीच जंग बेहद कठिन दौर में है। इस युद्ध ने न केवल सैनिकों की जान ली है, बल्कि दोनों देशों के सैन्य संसाधनों और आर्थिक स्थिति को भी पूरी तरह तबाह कर दिया है।
यूक्रनी जनरल स्टाफ की रिपोर्ट के अनुसार, रूस ने अब तक कुल 14,71,160 सैनिकों को खोया है। इस कड़े आंकड़े में पिछले चौबीस घंटों के दौरान हुए 1,190 रूसी सैनिक भी शामिल हैं जो घायल हुए हैं। रूसी सेना के लिए यह दैनिक नुकसान अत्यंत कड़ा और विनाशकारी साबित हो रहा है।
सैनिकों के साथ-साथ रूसी सेना के सैन्य उपकरणों को भी भारी नुकसान हुआ है। यूक्रेन की रिपोर्ट के अनुसार, रूस ने अब तक 12,276 टैंक, 25,162 बख्तरबंद लड़ाकू वाहन (armored combat vehicles) और 136,318 वाहन और ईंधन टैंक खो दिए हैं, जो उनकी सैन्य ताकत पर प्रहार है।
इसके अलावा, रूसी सेना ने 48,205 तोपखाने प्रणाली (artillery systems), 2,043 मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम और 1,577 वायु रक्षा प्रणालियां भी गंवाई हैं। हवाई ताकत में रूस ने 439 विमान और 354 हेलीकॉप्टर खोए हैं, जिससे उनकी हवाई संप्रभुता को कड़ा नुकसान हुआ है।
आधुनिक युद्ध के इस दौर में रूस ने अब तक 469,197 मानव रहित हवाई वाहन (UAV) और 2,311 मानव रहित ग्राउंड सिस्टम गंवाए हैं। इसके साथ ही, यूक्रेन के साथ हमलों में रूसी नौसेना के 35 जहाजों और नौकाओं तथा 2 पनडुब्बियों को भी पूरी तरह तबाह कर दिया गया है।
यूक्रेन की सेना सैन्य कारणों और गोपनीयता के कारण अपने नुकसान का खुलासा नहीं करती है। लेकिन थिंक-टैंक सीएसआईएस (CSIS) के अनुसार, रूस का नुकसान यूक्रेन की तुलना में लगभग 2:1 या 2.5:1 के अनुपात में काफी अधिक है, जो बहुत बड़ा अंतर है।
सीएसआईएस के अनुसार, फरवरी 2022 से दिसंबर 2025 के बीच यूक्रेन को लगभग 500,000 से 600,000 सैनिकों का नुकसान उठाना पड़ा था। इसमें से लगभग 100,000 से 140,000 सैनिकों के मारे जाने का अनुमान है, जो इस संघर्ष के भयंकर नुकसान को दर्शाता है।
राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने भी बताया कि इस युद्ध में कम से कम 55,000 यूक्रेनी सैनिक मारे गए हैं, जबकि कई अन्य लापता हैं। ड्रोन हमलों के कारण मारे गए सैनिकों के शवों को बरामद करना और उनकी डीएनए पुष्टि करना भी एक बड़ा काम बन चुका है।