बिना टैंक-मिसाइल के मनेगा रूस का विजय दिवस, 80 साल में पहली बार फीका रहेगा पुतिन का शक्ति प्रदर्शन, जानें वजह?

Russia Victory Day Parade: रूस इस साल 9 मई को अपने 'विजय दिवस' परेड बिना टैंकों और मिसाइलों के आयोजित करेगा। यूक्रेन युद्ध के बीच रक्षा मंत्रालय ने 'परिचालन कारणों' का हवाला देते हुए फैसला लिया है।
Russia's Victory Day to be Celebrated Without Tanks or Missiles; Putin's Show of Force Set to Be Subdued for the First Time in 80 Years Find Out Why.
रूसी टैंक, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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Russia Victory Day Parade No Tanks And Missiles: रूस की राजधानी मॉस्को के रेड स्क्वायर पर हर साल होने वाली 'विजय दिवस' (Victory Day) परेड इस बार इतिहास के पन्नों में एक अलग वजह से दर्ज होने जा रही है। रूसी रक्षा मंत्रालय ने एक चौंकाने वाली घोषणा करते हुए कहा है कि इस साल 9 मई को होने वाली परेड में टैंकों, मिसाइल प्रणालियों और अन्य भारी सैन्य उपकरणों का प्रदर्शन नहीं किया जाएगा। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह संभवतः पहला मौका है जब रूस अपनी इस सबसे प्रतिष्ठित सैन्य परेड को इतने सीमित स्वरूप में आयोजित करने जा रहा है।

रूसी सेना पर भारी दबाव

रूसी रक्षा मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में इस बदलाव के पीछे 'वर्तमान परिचालन स्थिति' (Operational Situation) को मुख्य कारण बताया है। हालांकि, मंत्रालय ने इस पर विस्तार से कोई जानकारी साझा नहीं की है कि ये परिचालन कारण क्या हैं। जानकारों का मानना है कि 2022 में यूक्रेन पर शुरू हुए हमले के बाद से रूसी सेना पर संसाधनों का भारी दबाव है, जिसके चलते अग्रिम मोर्चे से सैन्य उपकरणों को हटाकर परेड के लिए लाना चुनौतीपूर्ण हो गया है।

कैसा होगा परेड का स्वरूप?

भारी सैन्य वाहनों की अनुपस्थिति के बावजूद परेड पूरी तरह रद्द नहीं की गई है। इस बार रेड स्क्वायर पर विभिन्न सैन्य शैक्षणिक संस्थानों के कैडेट और रूसी सेना की विभिन्न शाखाओं के जवान मार्च पास्ट करते नजर आएंगे। रक्षा मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि परंपरागत हवाई फ्लाई-ओवर पहले की तरह ही जारी रहेगा, जिसमें रूसी वायु सेना के लड़ाकू विमान अपनी ताकत दिखाएंगे।

विजय दिवस का ऐतिहासिक महत्व

रूस के लिए 9 मई का दिन राष्ट्रीय गौरव का सबसे बड़ा प्रतीक है। यह दिन द्वितीय विश्व युद्ध में नाजी जर्मनी पर सोवियत संघ की जीत की याद में मनाया जाता है। इस युद्ध में सोवियत संघ ने अपने करीब 2.7 करोड़ नागरिकों को खोया था, जिसकी टीस आज भी रूसी जनमानस में गहराई से बसी है।

राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपने शासनकाल के दौरान इस दिन को न केवल ऐतिहासिक जीत के जश्न, बल्कि रूस की आधुनिक सैन्य शक्ति के प्रदर्शन के मंच के रूप में भी स्थापित किया है।

बदलता रुख और सुरक्षा चुनौतियां

पिछले साल यानी 2025 की परेड काफी भव्य थी, जिसमें 11,500 से अधिक सैनिकों और 180 से ज्यादा सैन्य वाहनों ने हिस्सा लिया था। उस दौरान 'यार्स' इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल और यूक्रेन युद्ध में इस्तेमाल हो रहे हथियारों का भी प्रदर्शन किया गया था। उस समारोह में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ब्राजील के राष्ट्रपति लुला दा सिल्वा जैसे वैश्विक नेता भी मौजूद थे।

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