ग्रीनलैंड पर कब्जे के लिए कानूनी रास्ता अपनाएंगे ट्रंप, संसद में पेश होगा अधिग्रहण बिल, मिल जाएगी खास पावर

US-Greenland Tensions: अमेरिका ग्रीनलैंड पर कब्जे का प्रयास कर सकता है, लेकिन डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने इसका विरोध किया है, और फिलहाल किसी आधिकारिक अधिग्रहण का खतरा कम ही है।
US Greenland Annexation and Statehood Bill
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ज ट्रंप (सोर्स- सोशल मीडिया)
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US Greenland Annexation Bill: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया तेवर और रुख को देखते हुए यह स्पष्ट हो गया है कि अमेरिका किसी भी समय ग्रीनलैंड पर सैन्य कार्रवाई कर सकता है और उसे अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश कर सकता है। इस दिशा में ट्रंप की सोच को कानूनी रूप देने के लिए अमेरिका में कदम उठाए जा रहे हैं। 

रिपब्लिकन पार्टी के सांसद रैंडी फाइन ने हाल ही में ‘ग्रीनलैंड एनेक्सेशन एंड स्टेटहुड एक्ट’ नामक बिल पेश किया है। इस बिल का उद्देश्य अमेरिकी राष्ट्रपति को ग्रीनलैंड पर कब्जा करने और अंततः उसे अमेरिकी राज्य का दर्जा देने के लिए कानूनी अधिकार प्रदान करना है। इसे लेकर पूरीू दुनिया में हड़कंप मचा हुआ है।

क्या है अमेरिका का ग्रीनलैंड बिल?

रैंडी फाइन ने इस बिल को पेश करते हुए कहा कि अमेरिका को आर्कटिक में चीन और रूस के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने के लिए ग्रीनलैंड पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘आज मुझे गर्व है कि मैंने ग्रीनलैंड एनेक्सेशन एंड स्टेटहुड एक्ट पेश किया, जो राष्ट्रपति को ग्रीनलैंड को संघ में शामिल करने के लिए आवश्यक साधन खोजने की अनुमति देगा।’ उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के “विरोधी” आर्कटिक क्षेत्र में पैर जमाने की कोशिश कर रहे हैं और इसे रोकना जरूरी है। फाइन का कहना है कि यह बिल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रुबियो के दृष्टिकोण को साकार करेगा, जिन्होंने स्पष्ट किया था कि वाशिंगटन को ग्रीनलैंड का अधिग्रहण करके अमेरिकी प्रभुत्व स्थापित करना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह कदम अमेरिका को अगली सदी के लिए रणनीतिक ऊंची जमीन देगा और चीन और रूस को आर्कटिक में अमेरिकी संप्रभुता में बाधा डालने से रोक देगा।

डेनमार्क ने जताया कड़ा विरोध

डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने अमेरिकी रुख को कड़ा विरोध किया है और कहा कि अमेरिका को ग्रीनलैंड पर कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने इसे पूरी तरह बेतुका भी बताया। ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नील्सन ने भी अमेरिका की इस तरह की बयानबाजी को अस्वीकार्य करार दिया।

ग्रीनलैंड के एक स्वतंत्रता समर्थक सांसद ने कहा कि ग्रीनलैंड के एनेक्सेशन का कोई खतरा नहीं है और अमेरिका के किसी भी दावे का कोई कानूनी आधार नहीं होगा। हालांकि, उन्होंने इस बात को लेकर चिंता जताई कि ग्रीनलैंड के जलक्षेत्र में रूसी और चीनी गतिविधियों पर निगरानी पर्याप्त नहीं है।

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