Iran Conflict पर व्हाइट हाउस का बड़ा बयान: राष्ट्रपति Trump ही तय करेंगे युद्धविराम की अगली समयसीमा

White House Statement: व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव लेविट ने स्पष्ट कहा है कि ईरान संघर्ष की समयसीमा सिर्फ राष्ट्रपति Trump तय करेंगे। ईरान पर नौसैनिक नाकेबंदी और भारी आर्थिक दबाव अभी भी लगातार जारी है।
President Trump Will Dictate the Iran Conflict Timeline and Ceasefire, Says White House Statement
कैरोलिन लेविट (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Trump Sets Iran Conflict Timeline: मध्य पूर्व में जारी भारी तनाव और संघर्ष के बीच व्हाइट हाउस ने ईरान को लेकर एक बहुत ही बड़ा बयान दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि वे समझदारी और व्यावहारिक समझ से कोई भी समझौता नहीं करेंगे। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट के अनुसार ईरान के अंदर नेताओं के बीच भारी मतभेद और गहरा विभाजन है। फिलहाल अमेरिका ने ईरान से किसी भी प्रस्ताव के लिए कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं की है और कूटनीतिक रुख अपनाया है।

सामूहिक जवाब का इंतजार

कैरोलिन लेविट ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ईरान की तरफ से एक सामूहिक और ठोस जवाब का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। जब तक यह जवाब नहीं आ जाता तब तक अमेरिका द्वारा सैन्य कार्रवाई और सीधे हमलों के मामले में एक युद्धविराम लागू है। हालांकि अमेरिका ने ईरान पर अपनी पकड़ कमजोर नहीं की है और उस पर लगातार कूटनीतिक और सामरिक दबाव बनाए रखा है।

आर्थिक और नौसैनिक नाकेबंदी

प्रेस सचिव के अनुसार अमेरिका द्वारा 'ऑपरेशन इकोनॉमिक फ्यूरी' के तहत प्रभावी नौसैनिक नाकेबंदी अभी भी पूरी तरह से जारी है। ईरानी बंदरगाहों से आने और जाने वाले सभी व्यापारिक जहाजों पर अमेरिकी सेना का नियंत्रण पूरी तरह से कायम किया गया है। इस सख्त नाकेबंदी के कारण ईरान को सैन्य रूप से ही नहीं बल्कि आर्थिक और वित्तीय रूप से भी भारी नुकसान हो रहा है।

राष्ट्रपति का विशेषाधिकार

प्रेस सचिव ने इस बात पर सबसे ज्यादा जोर दिया कि ईरान की तरफ से प्रस्ताव आने की कोई भी तय समयसीमा नहीं है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि अंत में यह समयसीमा अमेरिका के कमांडर-इन-चीफ और राष्ट्रपति Trump ही खुद तय करेंगे। राष्ट्रपति Trump जब यह महसूस करेंगे कि स्थिति संयुक्त राज्य अमेरिका और वहां की जनता के हित में है तभी वे अगला कदम उठाएंगे।

गुमनाम रिपोर्टों का खंडन

होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी और युद्धविराम को लेकर चल रही कई झूठी अफवाहों का प्रेस सचिव लेविट ने कड़ा खंडन किया है। उन्होंने बताया कि कुछ गुमनाम स्रोतों ने तीन से पांच दिन की समयसीमा की जो बात कही थी वह पूरी तरह से गलत है। ट्रंप ने खुद कोई समयसीमा नहीं दी है और वे अभी की नौसैनिक नाकेबंदी के परिणामों से पूरी तरह से संतुष्ट नजर आ रहे हैं।

ईरान की कमजोर स्थिति

वर्तमान समय में ईरान कूटनीतिक और आर्थिक दोनों ही मोर्चों पर बहुत ही ज्यादा कमजोर स्थिति में पहुंच चुका है। प्रेस सचिव लेविट के अनुसार इस पूरे विवाद में अभी सारी कूटनीतिक बढ़त पूरी तरह से राष्ट्रपति Trump के ही पास मौजूद है। ईरान सार्वजनिक रूप से जो कहता है वह अमेरिका की बातचीत टीम के सामने निजी रूप से कही गई बातों से काफी अलग होता है।

ईरान में नेताओं का विभाजन

व्हाइट हाउस ने दावा किया है कि ईरान के शासन के भीतर व्यावहारिक सोच रखने वालों और सख्त रुख वालों के बीच गहरा टकराव है। लेविट ने बताया कि अमेरिकी वार्ता टीम ने केवल उन चुनिंदा लोगों से बात की है जिनसे वास्तव में बातचीत की जानी चाहिए। लेकिन ईरान के अंदर बहुत ज्यादा विभाजन है और पिछले पचास सालों में उनके कई प्रमुख नेता दुनिया से मिट चुके हैं।

प्रस्ताव के लिए दी गई ढील

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव ने यह भी बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को अभी जानबूझकर थोड़ी सी ढील दी हुई है। अमेरिका चाहता है कि उनके एक मजबूत प्रस्ताव के जवाब में ईरान के सभी नेताओं की तरफ से भी सामूहिक प्रस्ताव मिले। इसीलिए अमेरिका फिलहाल सैन्य कार्रवाई रोकने के फैसले पर टिका हुआ है और सही समय के आने का इंतजार कर रहा है।

दुनिया का नेतृत्व जारी

अमेरिका का स्पष्ट मानना है कि जब तक ईरान से उचित जवाब नहीं आता तब तक वे दुनिया का नेतृत्व मजबूती से करते रहेंगे। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने देश को चलाने के साथ-साथ इस पूरे कूटनीतिक अभियान को भी बहुत ही बारीकी से संभाल रहे हैं। अमेरिकी अधिकारी ईरान से आ रहे अलग-अलग तरह के संदेशों पर नजर रख रहे हैं लेकिन उनकी हर बात को सच नहीं मानते हैं।

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भविष्य की कड़ी रणनीति

अमेरिका ने ईरानी शासन पर जो भारी दबाव बना रखा है वह आगे भी इसी तरह बिना किसी राहत के जारी रहने की पूरी उम्मीद है। ईरान को सैन्य रूप से कमजोर करने के साथ-साथ अमेरिका उसे पूरी तरह से आर्थिक रूप से भी नष्ट करना चाहता है। आने वाले समय में राष्ट्रपति ट्रंप का निर्णय ही इस पूरे मध्य पूर्व संघर्ष की अंतिम दिशा और दशा तय करने वाला है।

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