

Senator Bad Touch Journalist: सवाल पूछना लोकतंत्र में मीडिया का मूलभूत अधिकार है, लेकिन पोलैंड में एक सांसद ने इस पर आपत्ति जताते हुए सारी हदें पार कर दीं। पोलैंड की सेजम (संसद) के गलियारों में विपक्षी पार्टी PiS के सीनेटर वोइचेख स्कुर्केविच ने TVP की महिला पत्रकार जस्टिना डोब्रोश-ओराच के साथ सरेआम बदसलूकी की। सवाल पर बौखलाए सीनेटर ने पत्रकार के माइक को बंद करने की कोशिश में उनके शरीर को छुआ। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद चौतरफा आलोचना शुरू हो गई है।
यह घटना बुधवार को हुई, जब पत्रकार डोब्रोश-ओराच सीनेटर स्कुर्केविच से युद्ध खत्म करने की वार्ताओं और पोलैंड की कूटनीतिक भूमिका पर सवाल पूछ रही थीं। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में साफ देखा गया कि जैसे ही पत्रकार ने उनसे जवाब मांगना जारी रखा, स्कुर्केविच अचानक उनके माइक्रोफोन की ओर हाथ बढ़ाते हैं, जो उनके कॉलर के पास लगा था।
वह उसे बंद करने या हटाने की कोशिश करने लगे। इस पर पत्रकार तुरंत पीछे हटीं और तीखी आवाज में कहा, "कृपया मुझे मत छुएं।" मना करने के बावजूद सीनेटर ने उसे बंद करने का प्रयास जारी रखा, जिसके बाद दोनों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई।
वीडियो में स्कुर्केविच को अपने इस व्यवहार को सही ठहराने की कोशिश करते हुए देखा गया, जबकि डोब्रोश-ओराच बार-बार इस बात पर जोर देती रहीं कि शारीरिक संपर्क (Physical Contact) पूरी तरह अनुचित था। इस घटना ने सोशल मीडिया पर भारी नाराजगी पैदा कर दी है।
आलोचकों ने सीनेटर पर पेशेवर मर्यादाओं को तोड़ने और एक प्रेस इंटरैक्शन के दौरान महिला पत्रकार को चुप कराने की कोशिश करने का आरोप लगाया। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए, यूरोपीय सांसद क्रिज्स्तोफ ब्रेज्जा ने दस्तावेज साझा करते हुए जानकारी दी कि उन्होंने स्कुर्केविच के खिलाफ सीनेट की आचार समिति (Senate Ethics Committee) में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है।
ब्रेज्जा ने X पर लिखा, "उनका आक्रामक व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। हमें PiS नेताओं द्वारा बढ़ाई जा रही हिंसा की सीमा के खिलाफ सख्त प्रतिक्रिया देनी होगी।" इंटरनेट पर हजारों लोगों ने इस हरकत को पत्रकारों के प्रति एक तरह की धमकी और सत्ता का दुरुपयोग बताया है।
यूजर्स का कहना है कि एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में मीडिया की आजादी और सुरक्षा पर इस तरह का हमला अस्वीकार्य है। यह मामला अब केवल ऑनलाइन बहस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पोलैंड की राजनीति में भी बड़ा मुद्दा बन गया है, जिससे पहले से ही दबाव में चल रही विपक्षी PiS पार्टी और भी सवालों के घेरे में आ गई है।