

Zaid Hamid Warns Indian Army Will Take Over Amid The PoK Protests: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में पिछले दो महीनों से हिंसक विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। इन प्रदर्शनों में स्थानीय लोग वहां की सरकार और पाकिस्तानी सेना को सीधे तौर पर निशाना बना रहे हैं। इसी बीच पाकिस्तान के दक्षिणपंथी गुटों और कट्टरपंथियों में इस अशांति को लेकर भारी गुस्सा है। पाकिस्तानी कार्यकर्ता लाल टोपी उर्फ जैद हामिद ने इस संकट पर एक विवादित बयान दिया है।
जैद हामिद ने सोशल मीडिया पर सामने आए एक ऑडियो क्लिप में प्रदर्शनकारियों को जमकर गालियां दी हैं। उन्होंने प्रदर्शन कर रहे लोगों को जलील, लानती और पूरी तरह से नाशुक्रे करार दिया है। हामिद का दावा है कि अगर प्रदर्शन नहीं थमे तो वहां भारतीय सेना का नियंत्रण हो जाएगा। उनका कहना है कि इस स्थिति के बाद ही वहां के लोगों को पाकिस्तानी सेना की कद्र समझ आएगी।
जैद हामिद ने प्रदर्शनकारियों पर गंभीर गुस्सा व्यक्त करते हुए उन्हें कड़ी सजा देने की वकालत की है। वह ऑडियो में कहते सुने गए कि इन लोगों पर बल प्रयोग और सख्ती करना बहुत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों को मार-मार कर ही पाकिस्तान और उसकी सेना की कद्र सिखानी चाहिए। उनके अनुसार केवल भय और दमन की भाषा ही ये उपद्रवी प्रदर्शनकारी समझ सकते हैं।
हामिद ने कहा कि रावलकोट जैसे प्रदर्शनकारी इलाकों को भारतीय फौज को अपने नियंत्रण में ले लेना चाहिए। इसके बाद भारतीय सेना जब इन्हें ठीक से सबक सिखाएगी, तब इन्हें अपनी वास्तविक स्थिति समझ आएगी। तब ये लोग अपनी जान बचाने के लिए फिर से पाकिस्तानी फौज को गुहार लगाएंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि पीओके के लोगों को उनकी इस हरकत के लिए भारी कीमत चुकानी होगी।
इस कथित ऑडियो क्लिप में जैद हामिद अमानवीयता की चरम सीमा को भी पार करते हुए सुनाई दिए। उन्होंने मांग की कि पाकिस्तानी फौज को पीओके का हाल इजरायल और गाजा जैसा कर देना चाहिए। दूसरी तरफ पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ भी इन प्रदर्शनकारियों को देशद्रोही घोषित कर चुके हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पाकिस्तानी सेना का विरोध करने वालों से कोई बातचीत नहीं होगी।
पीओके में यह प्रदर्शन जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के नेतृत्व में लगातार आयोजित किए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग शरणार्थियों की आरक्षित सीटें खत्म करना, बेरोजगारी और महंगाई को रोकना है। वे कश्मीरियों के लिए अधिक अधिकार और न्याय संगत आर्थिक नीतियों की मांग भी कर रहे हैं। इस गंभीर हिंसा और पुलिस की गोलाबारी में अब तक 30 लोगों की मौत हो चुकी है।