पाकिस्तान-तुर्की रिश्तों में दरार? मुल्ला मुनीर की इस हरकत पर भड़के एर्दोगन, कहा- दोबारा किया तो…
Pak-Afghan Relations: पाकिस्तान-अफगानिस्तान शांति वार्ता तुर्की मध्यस्थता के बावजूद अविश्वास और विवादों से ठप हुई, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता, सहयोग और संवाद पर नकारात्मक असर पड़ा तथा अनिश्चितता बढ़ी।
- Written By: अक्षय साहू
पाकिस्तान-तुर्की रिश्तों में तनाव (सोर्स- सोशल मीडिया)
Turkey Pakistan Tensions: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच चल रही शांति वार्ता, जिसे तुर्की और कतर ने संयुक्त रूप से आगे बढ़ाया था, अब एक गंभीर विवाद का कारण बन गई है। सूत्रों के अनुसार, तुर्की की राष्ट्रीय खुफिया एजेंसी (MIT) के प्रमुख ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर से औपचारिक तौर पर असंतोष व्यक्त किया है। विवाद की शुरुआत अंकारा में हुई उस वार्ता से हुई, जहां पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल के व्यवहार ने माहौल बिगाड़ दिया।
बताया जा रहा है कि शांति वार्ता के लिए पाकिस्तानी सैन्य प्रतिनिधिमंडल का चयन खुद जनरल मुनीर ने किया था। तुर्की और कतर ने इस वार्ता की मेजबानी कर दोनों देशों, पाकिस्तान और अफगानिस्तान, के बीच बढ़ते तनाव को कम करने की पहल की थी। हालांकि बैठक के दौरान पाकिस्तानी टीम के व्यवहार ने मध्यस्थ देशों को निराश किया।
तुर्की ने जताई कड़ी आपत्ति
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तानी प्रतिनिधियों ने वार्ता के दौरान कई अतार्किक माँगें रखीं, इसके अलावा बार-बार तुर्की और कतर के मध्यस्थों को नजरअंदाज किया, और राजनयिक शिष्टाचार का भी पालन नहीं किया। इस रवैये से वार्ता की दिशा भटक गई और तुर्की के प्रयासों को ठेस पहुँची।
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सूत्रों ने बताया कि तुर्की की खुफिया एजेंसी के प्रमुख ने इस घटना को अपनी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा पर हमला माना और पाकिस्तानी सेना नेतृत्व को स्पष्ट संदेश दिया कि आपसी सम्मान के बिना कोई सहयोग संभव नहीं है। इसके बाद तुर्की ने पाकिस्तान की सैन्य प्रणाली से अपनी प्रत्यक्ष भागीदारी सीमित कर दी। बताया जाता है कि हाल के हफ्तों में दोनों देशों के बीच बैकडोर डिप्लोमेसी लगभग ठप हो गई है।
पाकिस्तान और तुर्की रणनीतिक साझेदार
पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान और तुर्की ने अपनी रणनीतिक साझेदारी को मजबूत किया है, खासकर रक्षा, आर्थिक और शिक्षा के क्षेत्रों में। मई 2024 में भारत-पाक तनाव के दौरान तुर्की ने पाकिस्तान का खुलकर समर्थन किया था।
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दोनों देशों ने रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें आधुनिक हवाई हथियारों और मिसाइल तकनीक का विकास शामिल है। इस सहयोग के बावजूद, हाल के विवादों ने दोनों देशों के सैन्य और राजनयिक संबंधों पर गहरा असर डाला है, जिससे अफगान शांति प्रक्रिया और क्षेत्रीय स्थिरता पर अनिश्चितता बढ़ गई है।
