पाकिस्तान में दिवाली पर हिंदुओं की तारीफ, जानें PM शहबाज शरीफ ने जिन्ना का जिक्र क्यों किया?

Pakistan Diwali Hindu Community: दिवाली पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने हिंदू समुदाय की तारीफ की। उन्होंने देश के विकास में योगदान सराहा और धार्मिक स्वतंत्रता व समान अधिकारों की प्रतिबद्धता दोहराई।
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लाहौर के कृष्ण मंदिर में 'दीवाली' (रोशनी का त्योहार) मनाते हुए एक पाकिस्तानी हिंदू महिला। सोर्स: (एएफपी/फाइल)
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Highlights:

  • दिवाली पर शहबाज शरीफ ने पाकिस्तान के हिंदू समुदाय को बताया राष्ट्रीय ताने-बाने का अहम हिस्सा।

  • पाकिस्तान के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक विकास में हिंदुओं के योगदान की सराहना की।

  • जबरन धर्म परिवर्तन और अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर उठते सवालों के बीच दिया संदेश।

Diwali in Pakistan: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने रविवार को दिवाली के मौके पर देश के हिंदू समुदाय की जमकर तारीफ की। उन्होंने पाकिस्तान के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक विकास में हिंदू समुदाय के योगदान को महत्वपूर्ण बताते हुए उसकी सराहना की। साथ ही उन्होंने सभी नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता, समान अधिकार और सम्मान देने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

शहबाज शरीफ ने अपने कार्यालय की ओर से जारी संदेश में कहा, "पाकिस्तान का हिंदू समुदाय हमारे राष्ट्रीय ताने-बाने का एक महत्वपूर्ण और अभिन्न हिस्सा है। देश के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक विकास में उसका अमूल्य योगदान सर्वोच्च प्रशंसा का हकदार है।"

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता पर गर्व है। उनकी सरकार धर्म, आस्था, रंग या जातीय पहचान की परवाह किए बिना सभी नागरिकों के अधिकारों, सम्मान और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर उठते रहे हैं सवाल

शहबाज शरीफ का यह बयान ऐसे समय आया है, जब पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों के साथ भेदभाव और असमान व्यवहार को लेकर सवाल उठते रहे हैं। हिंदू अधिकार संगठनों ने खासतौर पर लड़कियों और युवतियों के कथित जबरन धर्म परिवर्तन और विवाह के मामलों पर चिंता जताई है।

पाकिस्तान में हिंदू सबसे बड़े धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों में शामिल हैं। इनकी अधिकांश आबादी देश के दक्षिणी प्रांत सिंध में रहती है।

जिन्ना ने भी दिया था धार्मिक स्वतंत्रता का संदेश

पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना ने 11 अगस्त 1947 को संविधान सभा में दिए अपने संबोधन में धार्मिक स्वतंत्रता और समान नागरिकता पर जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि नागरिक अपने धर्म के अनुसार पूजा करने के लिए स्वतंत्र हैं और नागरिकों की हैसियत उनके धर्म से तय नहीं होनी चाहिए।

शहबाज शरीफ ने भी अपने संदेश में कहा कि पाकिस्तान एक शांतिपूर्ण, समावेशी और समृद्ध राष्ट्र बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि ऐसा समाज, जो अलग-अलग संस्कृतियों और परंपराओं को अपनाता है और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के सिद्धांतों का सम्मान करता है, वही अपने सभी नागरिकों को शिक्षा और आर्थिक अवसरों में समानता दे सकता है।

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दिवाली को बताया शांति और उम्मीद का त्योहार

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने दिवाली को अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह त्योहार शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और बेहतर भविष्य की उम्मीद का संदेश देता है।

शहबाज शरीफ ने अंतरधार्मिक सद्भाव, आपसी सम्मान और समझ को बढ़ावा देने के लिए नए सिरे से प्रयास करने की अपील की। साथ ही पाकिस्तान के हिंदू समुदाय को दिवाली की शुभकामनाएं देते हुए उनके जीवन में सुख और समृद्धि की कामना की।

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