Pakistan की मध्यस्थता विफल: ईरान-अमेरिका सीजफायर वार्ता टूटी, होर्मुज में 14 जहाज रोके गए

Middle East Tensions: अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता को लेकर Pakistan की कूटनीति पूरी तरह विफल हो गई है। मुनीर के तेहरान दौरे से भी कोई हल नहीं निकला और अब 22 अप्रैल की डेडलाइन से तनाव बहुत बढ़ा।
Pakistan Mediation Fails as US-Iran Ceasefire Talks Collapse Over Nuclear Demands and Tensions Rise 
पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (सोर्स-सोशल मीडिया )
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US Iran Ceasefire Talks: अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता करने की Pakistan की कोशिशें पूरी तरह से नाकाम साबित हुई हैं। इस्लामाबाद में 30 घंटे की लंबी बातचीत के बाद भी कोई ठोस या सकारात्मक नतीजा नहीं निकल सका है। Pakistan के सेना प्रमुख आसिम मुनीर के तेहरान दौरे के बाद भी अमेरिका-ईरान संघर्ष विराम वार्ता विफल रहीं। अब 22 अप्रैल की डेडलाइन नजदीक आने के कारण पूरे मध्य पूर्व में भारी तनाव की स्थिति बनी हुई है।

इस्लामाबाद में लंबी बातचीत

Pakistan की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच पहली सीधी और महत्वपूर्ण बातचीत लगभग 21 घंटे तक चली। नेताओं के आने-जाने और बीच के छोटे ब्रेक को मिलाकर यह पूरा कूटनीतिक सिलसिला 30 घंटे से ज्यादा समय तक खिंच गया था। इस अहम वार्ता में अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर गलीबाफ ने हिस्सा लिया था।

मुनीर का तेहरान दौरा

इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान की यह लंबी बातचीत टूटने के बाद Pakistan सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर तेहरान पहुंच गए। वहां पहुंचने के बाद उन्होंने ईरान के संसद अध्यक्ष गलीबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अरागची से मुलाकात कर लंबी बातचीत की। मुनीर की इन तमाम कूटनीतिक कोशिशों के बावजूद दूसरे दौर की बातचीत के लिए कोई भी नई तारीख तय नहीं हो पाई है।

परमाणु कार्यक्रम पर विवाद

इस पूरे अंतरराष्ट्रीय विवाद में सबसे बड़ी अड़चन ईरान का अपना विवादास्पद परमाणु कार्यक्रम बनकर सबके सामने आया है। अमेरिका की बिल्कुल स्पष्ट मांग है कि ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम तुरंत छोड़ दे लेकिन ईरान इसके लिए बिल्कुल तैयार नहीं है। ईरान का साफ तौर पर कहना है कि अमेरिका की मांगें बहुत ज्यादा थीं और उन्होंने हमारा भरोसा बिल्कुल नहीं जीता है।

होर्मुज की खाड़ी में नाकेबंदी

अमेरिका ने अपनी ताकत दिखाते हुए होर्मुज की खाड़ी की कड़ी नाकेबंदी शुरू कर दी है जिससे समुद्र में भारी तनाव पैदा हो गया है। अमेरिकी सेना ने इस इलाके में कार्रवाई करते हुए पिछले 72 घंटों में वहां से गुजरने वाले 14 बड़े जहाजों को वापस लौटा दिया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री ने दुनिया को स्पष्ट कहा है कि यह समुद्री नाकेबंदी जब तक जरूरी होगी तब तक इसी तरह जारी रखी जाएगी।

इजरायल और लेबनान सीजफायर

इस भारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल और लेबनान के बीच 10 दिन की सीजफायर का बड़ा ऐलान किया है। यह महत्वपूर्ण सीजफायर भारतीय समय के हिसाब से 17 अप्रैल की रात करीब ढाई बजे से आधिकारिक रूप से शुरू होने वाली है। यह पिछले 34 सालों में इजरायल और लेबनान के बीच पहली और सबसे बड़ी कूटनीतिक शांति की कोशिश मानी जा रही है।

सीजफायर के बावजूद हमले

सीजफायर के शांतिपूर्ण ऐलान के बावजूद इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के 200 से ज्यादा ठिकानों पर विनाशकारी हमले किए। इजरायल के इन भीषण हमलों के कारण 9 लोगों की दुखद मौत हो गई और 6 अन्य निर्दोष लोग बुरी तरह से घायल हो गए हैं। हिजबुल्लाह ने भी पीछे हटने से इनकार करते हुए उत्तरी इजरायल के सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और रॉकेट से अपने जवाबी हमले लगातार जारी रखे।

आगे का बढ़ता खतरा

28 फरवरी 2026 को शुरू हुए इस भयंकर संघर्ष के बाद 8 अप्रैल को दो हफ्ते की एक छोटी सीजफायर हुई थी। इस मौजूदा सीजफायर की आखिरी डेडलाइन 22 अप्रैल है और इसे आगे बढ़ाने पर अभी तक कोई भी सहमति नहीं बन सकी है। अगर इस तय तारीख से पहले कोई शांति समझौता नहीं हुआ तो पूरे क्षेत्र में फिर से एक बहुत भयंकर युद्ध शुरू हो जाएगा।

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