नेपाल में बाढ़ के बाद भारी संकट, मुर्दाघरों में जगह खत्म, शवों की पहचान करना हुआ मुश्किल

Nepal Flood Crisis: नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद मुर्दाघरों में जगह खत्म होने से शवों की पहचान करना अत्यंत कठिन हो गया है, जिसके बाद अब भरतपुर में एक नया अस्थाई शव गृह केंद्र बनाया गया है।
Nepal Flood Disaster Victims
नेपाल में भीषण बाढ़(सोर्स- सोशल मीडिया)
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Nepal Flood Disaster Victims: नेपाल में आई विनाशकारी भोटेकोशी बाढ़ और भीषण भूस्खलन के बाद हालात दिन-ब-दिन बेहद बदतर होते जा रहे हैं। मृतकों की लगातार बढ़ती संख्या के कारण देश के तमाम अस्पतालों के मुर्दाघरों में नए शवों को रखने की जगह बिल्कुल खत्म हो चुकी है।

शवों के बहुत अधिक समय तक पड़े रहने की वजह से परिजनों को अपने रिश्तेदारों की पहचान करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस भीषण मानवीय संकट को देखते हुए देश के आपदा प्रबंधन दल और जिला प्रशासन युद्धस्तर पर नए सुरक्षा इंतजामों में जुटे हैं।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से शवों का बहना और पहचान की समस्या

भोटेकोशी नदी के उग्र बहाव में बहकर आए लोगों के शव नदी की दिशा में सैकड़ों किलोमीटर दूर मैदानी इलाकों में मिल रहे हैं। रसुवा और नुवाकोट जिलों से बहकर आए अनेक शव नुवाकोट के साथ-साथ चितवन, तनहुं, नवलपरासी और अन्य तटीय क्षेत्रों में बरामद किए गए हैं।

नुवाकोट, धाडिंग और नवलपरासी के स्थानीय मुर्दाघरों में जगह की भारी कमी के कारण बहुत से शवों को पड़ोसी जिलों के अस्पतालों में भेजा जा रहा है। पोखरा के बड़े अस्पतालों ने भी आधिकारिक तौर पर बताया है कि कई जिलों से भारी संख्या में शव आने के बाद उनके मुर्दाघर पूरी तरह भर चुके हैं।

भरतपुर में अस्थायी शव गृह केंद्र का निर्माण

चितवन में बरामद शवों की बढ़ती संख्या को संभालने में अस्पतालों को हो रही परेशानी के बाद भरतपुर में एक नया अस्थायी केंद्र तैयार किया जा रहा है। त्रिशूली और नारायणी नदी के हिस्सों में गुरुवार सुबह तक 137 शव बरामद हो चुके थे, जिससे मुर्दाघरों पर भारी दबाव बढ़ गया है।

मुख्य जिला अधिकारी गणेश अर्याल की अध्यक्षता में हुई बैठक में भरतपुर मेट्रो के विद्युत रोड स्थित संस्थान को इस केंद्र में बदलने का फैसला लिया गया। अर्याल ने बताया कि वर्तमान में चितवन के अस्पतालों के मुर्दाघरों में एक साथ केवल 30 से 50 शव रखने की ही क्षमता उपलब्ध है।

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लापता लोगों की खोज जारी

यहां लगभग 250 शवों को सुरक्षित रखने के बाद भी अगर जगह कम पड़ी तो प्रशासन देवघाट के इलेक्ट्रिक श्मशान घाट का उपयोग करेगा। भरतपुर महानगरपालिका इस अस्थायी केंद्र की मरम्मत कराएगी और शवों को सड़ने से बचाने के लिए एयर कंडीशनर और ड्राई आइस की व्यवस्था करेगी। इस भयानक आपदा के बाद से अपने लापता परिजनों की तलाश में रसुवा, नुवाकोट, गोरखा और अन्य जिलों से सैकड़ों परिवार चितवन पहुंच रहे हैं।

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