भारत-नेपाल रिश्तों में नई हलचल! PM मोदी से मिलने के लिए बालेंद्र शाह ने रखी बड़ी शर्त, दिल्ली में होगा धमाका

India-Nepal Relations: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के नए पीएम बालेंद्र शाह (बालेन) को भारत आने का न्योता दिया है। दोनों देश इस यात्रा को महज औपचारिक न रखकर ठोस नतीजों वाली बनाना चाहते हैं।
Balendra Shah India Visit
बालेंद्र शाह (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Balendra Shah India Visit: भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के नए प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (बालेन) को भारत यात्रा के लिए आमंत्रित किया है। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि दोनों देश इस यात्रा को सिर्फ औपचारिक न रखकर ठोस परिणाम देने वाली बनाना चाहते हैं।

खनाल ने मॉरीशस में इंडियन ओशन कॉन्फ्रेंस के दौरान बातचीत में बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 मार्च को बालेन शाह के पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद बधाई संदेश के साथ यह निमंत्रण दिया था। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच इस यात्रा को “परिणाम-उन्मुख” बनाने के लिए तैयारी चल रही है।

ठोस परियोजनाओं पर फोकस

नेपाल के विदेश मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री शाह ने निमंत्रण स्वीकार कर लिया है, लेकिन यात्रा तभी होगी जब दोनों पक्ष तकनीकी और राजनीतिक स्तर पर पूरी तैयारी कर लेंगे। उनका कहना था कि इस बार सिर्फ प्रतीकात्मक या औपचारिक दौरे से बचने की कोशिश की जा रही है और ठोस परियोजनाओं पर फोकस किया जा रहा है।

जल्द भारत दौरे पर आएंगे बालेंद्र

इस घटनाक्रम के बीच एस. जयशंकर और शिशिर खनाल के बीच भी बातचीत हुई, जिसमें यह सहमति बनी कि उच्च-स्तरीय यात्राएं तभी होंगी जब दोनों देश अपनी प्राथमिकताओं के आधार पर ठोस एजेंडा तय कर लें। दोनों पक्ष मौजूदा परियोजनाओं की समीक्षा और सहयोग के नए क्षेत्रों की तलाश पर भी सहमत हुए हैं।

नेपाल की ओर से पहले आंतरिक स्तर पर प्राथमिकताओं को स्पष्ट किया जाएगा, जिसके बाद इन्हें भारत के साथ साझा किया जाएगा। इसके बाद आगे की बातचीत के लिए भारत के विदेश सचिव के नेपाल दौरे की संभावना जताई गई है।

भारत और नेपाल के बीच गहरे संबंध

गौरतलब है कि भारत और नेपाल के बीच कई स्तरों पर सहयोग तंत्र मौजूद हैं, जो सुरक्षा, जल संसाधन, सीमा प्रबंधन, व्यापार और कृषि जैसे क्षेत्रों को कवर करते हैं। हालांकि, इनमें से कुछ तंत्र लंबे समय से सक्रिय नहीं हैं, जिन्हें फिर से गति देने पर भी जोर दिया जा रहा है। इस संभावित यात्रा को दोनों देशों के रिश्तों में नई दिशा देने के अवसर के रूप में देखा जा रहा है, जहां फोकस ठोस नतीजों और व्यावहारिक सहयोग पर रहेगा।

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