

Nepal Disaster History 1934 to 2026: नेपाल में बुधवार तड़के अचानक आई तेज बाढ़ का असर देश के कई हिस्सों में देखने को मिला। जहां देखते ही देखते कई गांव पानी में बह गया। अब तक कुल 95 लोगों के शव बरामद हुए हैं। वहीं, हजारों लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आ रही है। हालांकि, यह कोई पहली बार नहीं है, जब नेपाल में इस तरह का मंजर देखने को मिल रहा है। इससे पहले भी नेपाल तेज भूकंप और भीषण बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं को दर्द झेल चुका है।
साल 1934 में आए महाभूकंप में दस हजार से अधिक लोगों की मौत हुई थी। वहीं, अब 2026 में आए इस जल प्रलय में भी भारी जान-माल की नुकसान की संभाना जताई जा रही है। आइए इस स्टोरी के जरिए नेपाल में आई उन बड़ी प्राकृतिक आपदाओं की टाइमलाइन देखते हैं। इसके साथ ही हम यह समझने की कोशिश करेंगे कि आखिर बार-बार क्यों उजड़ती रही हिमालय की गोद?
1934 का नेपाल-भारत भूकंप या 1934 का बिहार-नेपाल भूकंप भारत के इतिहास के सबसे बुरे भूकंपों में से एक था। यह 8.0 मैग्नीट्यूड का भूकंप 15 जनवरी 1934 को दोपहर करीब 2:13 बजे पर आया था और इससे उत्तरी बिहार और नेपाल में बहुत नुकसान हुआ था। इस घटना का केंद्र पूर्वी नेपाल में माउंट एवरेस्ट से लगभग 9.5 किमी (5.9 मील) दक्षिण में स्थित था। इस आपदा में 10,700 से 12,000 लोगों की मौत हुई थी।
1988 का नेपाल भूकंप 20 अगस्त 1988 को नेपाल-भारत बॉर्डर के पास आया था। इसका सेंटर उदयपुर जिले में था। इसकी तीव्रता 6.9 थी, जो 1934 के बाद देश में आया सबसे बड़ा भूकंप था। नेपाल और बिहार में मरने वालों की संख्या 1,003 तक पहुंच गई थी। स्कूलों और अस्पतालों सहित बिल्डिंग्स और इंफ्रास्ट्रक्चर को काफी नुकसान हुआ, जिससे लगभग पांच लाख लोग बेघर हो गए, जिसका हेल्थ पर काफी असर पड़ा और इकॉनमी बर्बाद हो गई।
19-20 जुलाई 1993 को हुई भारी बारिश ने विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन को जन्म दिया, जिससे यह नेपाल के इतिहास की सबसे खराब मौसम आपदा बन गई। मूसलाधार बारिश ने करमैया में प्रमुख जलविद्युत जलाशय, बागमती बैराज को प्रभावित किया और कई भूस्खलन और अचानक बाढ़ को जन्म दिया। 1000 साल में एक बार आने वाली इस बाढ़ ने नए बने बैराज को नुकसान पहुंचाया और 700 से ज्यादा लोगों की मौत हुई।
अप्रैल 2015 नेपाल भूकंप को गोरखा भूकंप के रूप में भी जाना जाता है। इस भूकंप ने नेपाल, भारत, चीन और बांग्लादेश में 8,962 लोगों की जान ले ली और 21,952 घायल हो गए। यह 25 अप्रैल 2015 को नेपाल के समय के अनुसार 11:56 पर आया। इसका केंद्र गोरखा जिले के पूर्व में बारपाक गांव था, जो काठमांडू से लगभग 85 किमी उत्तर-पश्चिम में है। यह 1934 के नेपाल-भारत भूकंप के बाद से नेपाल में आई सबसे बुरी प्राकृतिक आपदा थी।
अगस्त 2014 में जुरे गांव में भीषण लैंडस्लाइड हुआ, जिसने सुनकोशी नदी का रास्ता रोककर आर्टिफिशियल झील बना दी थी। इसमें 150 से अधिक लोग मारे गए थे। वहीं, अप्रैल 2014 में खुंबू आइसफॉल पर आए हिमस्खलन में 16 शेरपा गाइडों की मौत हो गई थी।
3 नवंबर 2023 को नेपाल के जाजरकोट में आई 5.7 तीव्रता की भूकंप में 153 लोगों की मौत हो गई थी। वहीं, कम से कम 375 घायल हो गए। भूकंप को पश्चिमी नेपाल और उत्तरी भारत में व्यापक रूप से महसूस किया गया था, और यह 2015 के बाद से देश में आया सबसे घातक भूकंप है।
2017 में मॉनसून के दौरान आई इस बाढ़ ने पूरे दक्षिण नेपाल (तराई क्षेत्र) को डुबो दिया था, जिसमें 140 से अधिक मौतें हुईं और लाखों लोग प्रभावित हुए। इसके बाद साल 2024 के सितंबर में काठमांडू घाटी और बागमती प्रांत में रिकॉर्ड तोड़ बारिश के कारण आई बाढ़ और भूस्खलन में 240 से अधिक लोगों की जान चली गई।
नेपाल दुनिया का चौथा सबसे ज्यादा जलवायु संवेदनशील देश है। यह सूखे, बाढ़ और लैंडस्लाइड जैसे मौसम से जुड़े अलग-अलग खतरों का शिकार होता रहा है। हालांकि, नेपाल चरम मौसम की घटना के लिए बहुत ज्यादा संवेदनशील होने बावजूद भी देश के लोगों को बताने के लिए एक्सट्रीम वेदर वॉर्निंग सिस्टम नहीं बनाया गया है। जिससे के जान-माल का नुकसान काफी हद तक बढ़ जाता है।