

Highlights:
नेपाल के पूर्व सांसद गमबहादुर श्रीष ने दो बकरियों और एक लाख नेपाली रुपये से कारोबार शुरू किया।
अब 39 बकरियों के साथ संतरे की खेती, मधुमक्खी और मछली पालन से भी कमाई कर रहे हैं।
उनकी पहल से गांव के 15 परिवारों ने व्यावसायिक बकरी पालन शुरू किया।
Nepal Former MP Gambhadur Shrestha: नेपाल की राजनीति में करीब दो दशक तक सक्रिय रहे पूर्व सांसद गमबहादुर श्रीष इन दिनों खेती और पशुपालन के जरिए अपनी आजीविका चला रहे हैं। नेपाल के संविधान निर्माण की प्रक्रिया में शामिल रहे श्रीष ने गांव लौटकर स्वरोजगार का रास्ता चुना। अब वह बकरी पालन, संतरे की खेती, मधुमक्खी पालन और मछली पालन से कमाई कर रहे हैं। उनकी पहल से गांव के दूसरे परिवार भी कृषि व्यवसाय की ओर बढ़ रहे हैं।
नेपाली मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, श्रीष ने करीब छह साल पहले दो बकरियों और एक लाख नेपाली रुपये के निवेश से अपना काम शुरू किया था। आज उनके फार्म में 39 बकरियां हैं। वह हर साल 15 से 20 बकरे बेचते हैं। उनके फार्म में खारी और जमुनापारी नस्ल की बकरियां पाली जाती हैं।
शुरुआत में उन्हें नुकसान भी हुआ। खरीदी गई कुछ बकरियां स्थानीय मौसम के अनुकूल नहीं थीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। बाद में पशुधन सेवा केंद्र की मदद से फार्म के प्रबंधन और आधुनिक शेड की व्यवस्था बेहतर की।
श्रीष ने पारंपरिक खेती के साथ नए विकल्प अपनाए हैं। उन्होंने खेत में संतरे के 350 पेड़ लगाए हैं, जिनसे अब फल मिलने लगे हैं। बकरियों के चारे के लिए खाली जमीन पर घास भी उगाई जाती है।
इसके अलावा, उनके पास मधुमक्खियों के 16 छत्ते हैं, जिनसे शहद का उत्पादन होता है। सिंचाई के लिए बनाए गए तालाब में उन्होंने मछली पालन भी शुरू किया है। इस तरह वह आमदनी के कई स्रोत विकसित कर रहे हैं।
श्रीष की कोशिशों से बरंजा गांव में कृषि उद्यमिता को बढ़ावा मिला है। उनके प्रयास से बने किसान समूह के रास्ते पर चलते हुए 15 परिवारों ने व्यावसायिक स्तर पर बकरी पालन शुरू किया है। उनका मानना है कि खेती और पशुपालन ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय बढ़ाने के प्रभावी माध्यम बन सकते हैं।
राजनीति से अब भी जुड़े हैं श्रीष
गमबहादुर श्रीष छात्र जीवन से ही सीपीएन (माओवादी) से जुड़े थे। वर्ष 2006 में वह अंतरिम विधायिका के सदस्य बने और 2008 से 2014 तक पहली संविधान सभा में प्रतिनिधित्व किया। इसके बाद वह अपने गांव लौट आए और कृषि व्यवसाय पर ध्यान देने लगे।
हालांकि, उन्होंने राजनीति से पूरी तरह दूरी नहीं बनाई है। वह कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल के केंद्रीय सदस्य हैं और खेती के साथ राजनीतिक गतिविधियों को भी जारी रखना चाहते हैं।