

Nepal Flood Chinese Missing: नेपाल और तिब्बत के सीमावर्ती इलाकों में भारी बारिश के बाद भोटेकोशी नदी में आई फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचाई है। इस भीषण जलप्रलय के कारण तिब्बत और नेपाल के विभिन्न पर्वतीय क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुआ है, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त है।
बाढ़ और मलबे के बहाव में बह जाने के कारण अब तक दोनों देशों में कुल मिलाकर लगभग 270 लोगों की मौत होने की पुष्टि हो चुकी है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इस अचानक आई भीषण आपदा के बाद से प्रभावित क्षेत्रों में सैकड़ों लोग अभी भी मलबे के नीचे दबे या लापता हैं।
लापता नागरिकों की खोज और प्रभावितों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए दोनों देशों की सरकारें लगातार राहत कार्य चला रही हैं। इस महासंकट के बीच नेपाल के आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लगभग 100 भारतीय पर्यटकों को सुरक्षित बचा लिया है।
इसके साथ ही राहत कर्मियों ने रसुवा सीमा क्षेत्र के पास एक जलविद्युत परियोजना स्थल से 25 चीनी श्रमिकों को भी सुरक्षित निकाल लिया है। सुरक्षित निकाले गए इन सभी नागरिकों को आपातकालीन राहत शिविरों में भेज दिया गया है, जहां उन्हें भोजन, दवा और प्राथमिक चिकित्सा प्रदान की जा रही है।
राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने तिब्बत के गिरोंग बॉर्डर पोर्ट पर मडस्लाइड के बाद लापता लोगों के लिए बचाव अभियान तेज करने का कड़ा आदेश दिया है। प्रवक्ता लिन जियान ने बताया कि लापता चीनी नागरिकों में मुख्य रूप से पर्यटक शामिल हैं, जिनकी खोज के लिए सेना की वेस्टर्न थिएटर कमांड को उतारा गया है। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बताया कि अचानक आई इस बाढ़ में लापता हजारों लोगों में लगभग 300 भारतीय पर्यटक भी शामिल हैं, जिन्हें खोजने का प्रयास जारी है।
बाढ़ और भूस्खलन से नेपाल-चीन सीमा पर स्थित मुख्य लैंड क्रॉसिंग और फ्रेंडशिप ब्रिज क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिससे दोनों देशों के बीच संपर्क कई घंटे ठप रहा। सड़कें नष्ट होने के साथ ही बिजली और संचार व्यवस्था पूरी तरह से कट गई है, जिसके सुधार के लिए चीन की टीमें विद्युत ग्रिड की मरम्मत कर रही हैं। नेपाल पुलिस के अनुसार रसुवा में दो, नुवाकोट में 12, धाडिंग में 27, चितवन में 69 और गोरखा में 20 मौतें हुई हैं, जिससे मृतकों का आंकड़ा बढ़ रहा है।