

Nepal Floods: नेपाल के रसुवा जिले में आई विनाशकारी अचानक आई बाढ़ से अब तक 177 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग अभी भी लापता हैं। इनमें सुरक्षाकर्मियों और विदेशी पर्यटकों समेत स्थानीय नागरिक शामिल हैं। इस घटना से साथ ही नेपाल की वह चिंता सच हो गई जिसका डर उसने घटना से चार महीने पहले ही जताया था।
नेपाल की चिंता के केंद्र में चीन का निर्माण कार्य था। चीन ने चार महीने पहले भोटेकोशी नदी के किनारे अपनी तरफ सुरक्षा दीवार बनाई थी, जिस पर नेपाल ने चिंता जताई थी। ऐसे में सवाल उठता है क्या नेपाल में आई इस आपदा के लिए चीन जिम्मेदार है? नेपाल ने चीन के निर्माण कार्य पर क्या चिंता जताई थी? और चीन ने क्यों नेपाल आपत्ति के बाद भी निर्माण किया?
भोटेकोशी नदी के क्षेत्र को भौगोलिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील और आपदा संभावित माना जाता है। चीन ने इस साल अप्रैल में नेपाल-चीन सीमा पर भोटेकोशी नदी में अपनी तरफ एक सुरक्षा दीवार का निर्माण करना शुरु किया था। इसे लेकर नेपाल के विशेषज्ञों और स्थानीय प्रशासन ने आपत्ति जताते हुए चीन की आलोचना की थी। विशेषज्ञों ने उस समय ही इसे लेकर डर जताया था कि इतने संवेदनशील क्षेत्र में अगर चीन की दीवार के कारण नदी का प्राकृतिक मार्ग बदलता है, तो इससे नेपाल में विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना था कि सिंधुपालचौक जिले का तातोपानी बॉर्डर पॉइंट, जो चीन के साथ व्यापार के लिए एक प्रमुख केंद्र है, पहले ही मानसून के दौरान भूस्खलन की मार झेलता रहता है। ऐसे में नदी के प्रवाह के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ नेपाल के लिए भारी आर्थिक और मानवीय नुकसान का कारण बन सकती है। नेपाल का यह डर कई मायनों में अब सच हो गया है।
नेपाली अधिकारियों ने इसके साथ ही चीन के इस कदम 1963 में दोनों देशों के बीच हुए ऐतिहासिक सीमा समझौते का सीधा उल्लंघन बताया था। इस संधि के मुताबिक, सीमावर्ती क्षेत्रों में किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य करने से पहले दोनों देशों के बीच आपसी सहमति और सूचना का आदान-प्रदान जरूरी है। समझौते में खासतौर पर यह उल्लेख किया गया है कि कोई भी पक्ष एकतरफा कार्रवाई करते हुए उन नदियों का रास्ता नहीं बदल सकता, जो दोनों देशों के बीच प्राकृतिक सीमा का कार्य करती हैं।
नेपाल के गृह मंत्रालय ने पुष्टि की थी कि यह निर्माण पिलर नंबर 53 के पास हो रहा है। हालांकि चीन ने निर्माण कार्य को अपनी सीमा के अंदर बताया था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत सीमावर्ती नदियों पर निर्माण के प्रभाव का आकलन करना जरुरी है। सिंधुपालचौक के मुख्य जिला अधिकारी रामकृष्ण अधिकारी की रिपोर्ट के बाद, नेपाल के विदेश मंत्रालय ने इस मामले को चीन के सामने उठाया था। काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल ने चीन से इस निर्माण कार्य को तुरंत रोकने की मांग की थी। हालांकि चीन ने निर्माण को अपनी सीमा के भीतर होने की बात कहते हुए नेपाल की चिंता नजरअंदाज कर दिया था।
अब जब नेपाल का डर सच हो गया है, तो चीन अपनी गलती मानने की जगह नेपाल को ही इसके लिए जिम्मेदार बताया दिया है। चीन के न्यूज एजेंसी सिन्हुआ ने दावा किया कि नेपाल में आपदा के लिए चीन जिम्मेंदार नहीं है, बल्कि बाढ़ नेपाल में हुए मडस्लाइड की वजह से आई है। इससे चीनी इलाके को भी भारी नुकसान हुआ है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बाढ़ से प्रभावित इलाकों में राहत-बचाव अभियान चलाने का आदेश दिया दिए है। हालांकि नेपाल के अधिकारियों ने चीनी दावे को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि बाढ़ तिब्बत से शुरू हुई है, जिसने रसुवा जिले में भारी नुकसान पहुंचाया है।
अधिकारियों ने इसके साथ यह भी आरोप लगाया कि चीन की ओर से उन्हें सूचना समय पर प्राप्त नहीं हुई। अधिकारियों के मुताबिक, चीन की ओर से सूचना मिलने में करीब 45 मिनट की देरी हुई, जो ऐसी प्राकृतिक आपदा में अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो सकता था। चीन की ओर से हुई इस देरी के चलते प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक जानकारी देर से पहुंची। जिससे प्रभावित क्षेत्र में भारी जान-माल का नुकसान हुआ है। इस घटना में अब तक 177 लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग लापता हैं।