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नेपाल के पश्चिमी गोरखा जिले से बहने वाली बूढ़ी गंडक नदी में बाढ़ आ गई।
रविवार सुबह नेपाल के नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी ने बाढ़ की चेतावनी जारी की।
एक हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट की कंस्ट्रक्शन साइट को भी नुकसान पहुंचा है।
Budhi Gandaki River Flood: नेपाल में एक बार फिर बाढ़ से तबाही का मंजर सामने आया है। बूढ़ी गंडक नदी में सुबह अचानक से बाढ़ आ गई, जिसमें कई मकान डूब गए है।
नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी ने ट्वीट किया है, "बुढ़ी गंडकी नदी में चुमानुवमी रूरल म्युनिसिपैलिटी-6 की तरफ से जबरदस्त बाढ़ आ रही है, इसलिए जब तक बाढ़ गुजर न जाए, त्रिशूली दोभान तक नदी के पास न जाएं। ऊंची जगहों पर रहें।"
गोरखा के चीफ डिस्ट्रिक्ट ऑफिसर धर्मेंद्र कुमार मिश्रा ने रविवार को बताया कि अभी तक किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है। हालांकि, बूढ़ी गंडक नदी के किनारे बसे दर्जनों घर जो चीन की सीमा के पास चुमनुबरी रूरल म्युनिसिपैलिटी इलाके से गुजरती है बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।
उन्होंने कहा, "हम बाढ़ से हुए नुकसान की जानकारी इकट्ठा कर रहे हैं। चुमनुबरी रूरल म्युनिसिपैलिटी के जगत और सल्लेरी गांवों में कुछ घर, और साथ ही 341 MW के बूढ़ी गंडक हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट का कैंप भी बह गया है।"
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बाढ़ कई घरों, सस्पेंशन पुलों और एक स्टील के पुल को बहा ले गई है। इसके अलावा, एक हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की कंस्ट्रक्शन साइट को भी नुकसान पहुंचा है। शुरुआती अनुमानों से पता चलता है कि लोकपा और चुमलिंग के बीच हुए भूस्खलन के कारण बाढ़ आई।
माना जा रहा है कि इस भूस्खलन ने बूढ़ी गंडक की सहायक नदी, सियार खोला के बहाव को रोक दिया था। हालांकि, आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है। बाढ़ का सही कारण और नुकसान का पूरा आकलन अभी उपलब्ध नहीं है।
चुमनुबरी रूरल म्युनिसिपैलिटी की वाइस-चेयरपर्सन लक्ष्मी गुरुंग ने स्थानीय न्यूज पोर्टल 'ऑनलाइनखबर' को बताया कि बूढ़ी गंडक में आई बाढ़ काफी हद तक उस विनाशकारी बाढ़ जैसी है जो कभी भोटे कोशी नदी में आई थी। उन्होंने कहा कि हालात भोटे कोशी बाढ़ की याद दिलाते हैं। उन्होंने बताया कि दर्जनों घर बह गए हैं और अभी कुल नुकसान की सही तस्वीर बताना जल्दबाजी होगी।
इस बीच, नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) ने नदी के किनारे रहने वाले लोगों से सुरक्षित जगहों पर जाने की अपील की है। अथॉरिटी ने चेतावनी दी है कि नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर चला गया है।
यह ताजा घटना रसुवा और त्रिशूली नदी के इलाकों में आई भयानक बाढ़ के एक महीने से कुछ ज्यादा समय बाद हुई है। NDRRMA के अनुसार, उस बाढ़ में 1,455 लोगों की जान चली गई थी, जबकि 5,285 लोग अभी भी लापता हैं।
बालेन शाह ने बताया है कि बूढ़ी गंडकी नदी में बाढ़ आने के बाद खोज और बचाव अभियान के लिए नेपाली सेना की एक टुकड़ी को हवाई और जमीनी दोनों रास्तों से तैनात किया गया है। उन्होंने बताया कि जगत इलाके से छह लोगों को हवाई मार्ग से सुरक्षित निकाला गया। इस इलाके में भूस्खलन का खतरा है।
बालेन शाह ने यह भी कहा कि राहत और बचाव कार्यों में तेजी लाने के लिए काठमांडू में तैनात एक 'जॉइंट क्विक रिएक्शन टीम' को भी हवाई मार्ग से प्रभावित इलाके में भेजा गया है।