

Nepal Communal Violence PM Balen Shah Appeal For Peace: नेपाल के मधेश प्रदेश में हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच भड़की भारी सांप्रदायिक हिंसा से पूरे इलाके में गहरा तनाव पैदा हो गया है। सुनसरी जिले से रविवार को शुरू हुई यह भयंकर हिंसा अब सिराहा और धनुषा जिले तक पूरी तरह फैल गई है। इस हिंसक टकराव और पुलिस के साथ हुई भीषण झड़पों में अब तक कुल तीन लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है। यह स्थिति नेपाल सरकार के लिए बहुत ही ज्यादा चिंताजनक बन गई है।
देश के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने इस बेहद नाजुक स्थिति को गंभीरता से लेते हुए सभी नागरिकों से शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने टेलीविजन पर अपने खास संबोधन में मृतकों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और घटना की निष्पक्ष जांच का पूरा भरोसा दिलाया। गृह मंत्रालय ने इस हिंसक घटना की गहराई से जांच के लिए तुरंत एक विशेष जांच समिति का भी गठन कर दिया है। स्वास्थ्य अधिकारियों को सभी घायल लोगों का मुफ्त और बेहतर इलाज करने का कड़ा निर्देश दिया गया है।
इस गंभीर हिंसा की मुख्य शुरुआत 26 जुलाई को सुनसरी जिले के कप्तानगंज क्षेत्र में एक धार्मिक यात्रा के दौरान हुई थी। श्रावण महीने में बोलबम पर्व के हिंदू श्रद्धालु कोशी बैराज से पवित्र जल लेकर तेज डीजे संगीत के साथ आगे जा रहे थे। रास्ते में मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने इस तेज संगीत पर भारी आपत्ति जताई जिसके बाद दोनों पक्षों में भयंकर बहस शुरू हो गई। यह बहस और विवाद अचानक से बहुत उग्र हो गया।
देखते ही देखते यह छोटा सा विवाद धक्का-मुक्की और एक बहुत ही बड़े हिंसक टकराव में पूरी तरह से बदल गया। दोनों समुदायों के लोग लाठियां, पत्थर, बांस और लोहे की रॉड जैसे खतरनाक हथियार लेकर बहुत बड़ी संख्या में घटनास्थल पर इकट्ठा हो गए। स्थिति को बेकाबू होता देखकर पुलिस को मजबूरन सख्त हस्तक्षेप करना पड़ा जिसमें पुलिस की गोली लगने से एक युवक ओम प्रकाश मेहता की मौत हो गई। इसके बाद पूरे इलाके में भयानक हिंसा भड़क उठी।
पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई इस भीषण झड़प में अब तक तीन लोगों को अपनी कीमती जान गंवानी पड़ी है। इनमें जय प्रकाश मेहता, ओम प्रकाश मेहता और एक किशोर गणेश यादव का नाम आधिकारिक रूप से शामिल बताया गया है। सिराहा जिले में हुई हिंसक झड़प के दौरान गोली लगने से युवा गणेश यादव की मौके पर ही मौत हो गई। यह पूरी घटना बहुत ही ज्यादा दुखद और खौफनाक है।
वहीं जय प्रकाश मेहता और ओम प्रकाश मेहता की जान रविवार को सुनसरी में हुई भयानक पुलिस झड़प के कारण चली गई। इन मौतों के बाद पूरे इलाके में भारी तनाव फैल गया है और कई जगहों पर आगजनी की घटनाएं हुई हैं। हालात को तुरंत काबू में करने के लिए प्रशासन ने सिराहा और जनकपुरधाम के कई संवेदनशील इलाकों में सख्त कर्फ्यू लगा दिया है। पुलिस बल लगातार इन सभी प्रभावित क्षेत्रों में कड़ी गश्त कर रहा है।
नेपाल सरकार और प्रधानमंत्री बालेन शाह पर इस संकट के समय सही राष्ट्रीय नेतृत्व नहीं देने का बहुत बड़ा आरोप लगा है। विपक्षी नेताओं ने उनकी कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री ने स्थिति सुधारने के लिए कोई भी सर्वदलीय बैठक नहीं बुलाई। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी द्वारा बुलाई गई अहम बैठक में भी प्रधानमंत्री और गृह मंत्री दोनों पूरी तरह से अनुपस्थित रहे। आलोचकों ने राष्ट्रपति को जानकारी न देने का भी गंभीर मुद्दा उठाया है।
प्रधानमंत्री बालेन शाह ने अफवाहों को रोकने के लिए लोगों से सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी साझा नहीं करने की अपील की है। गुरुवार को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक में देश की समग्र सुरक्षा स्थिति की पूरी बारीकी से समीक्षा की गई। भारत की सीमा से लगे नेपाल के पर्सा जिले में भी एहतियात के तौर पर सख्त निषेधाज्ञा पूरी तरह से लागू कर दी गई है। शांति बनाए रखने के लिए सुरक्षा एजेंसियों में आपसी तालमेल लगातार बढ़ाया जा रहा है।