

Nepal Flood Alert: नेपाल की भोटेकोशी नदी में बुधवार को अचानक आई विनाशकारी बाढ़ से अब तक 162 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 400 लोग अभी भी लापता हैं। इसी बीच वैज्ञानिकों ने नेपाल में एक और संभावित आपदा की चेतावनी जारी की है। वैज्ञानिकों ने बताया कि नेपाल-चीन सीमा के ऊपरी हिस्से में अब भी एक पानी का अवरोध (वाटर ब्लॉकेज) मौजूद है, जिसके टूटने पर एक नया जलसैलाब आ सकता है।
काठमांडू स्थित इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) की ओर से यह चेतावनी ऐसे समय में सामने आई है जब भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचा रखी है। बाढ़ से कई बस्तियों, सड़कों तथा बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया है। ICIMOD के वैज्ञानिक इस आपदा की जांच कर रहे हैं, साथ ही वो इस बात का भी पता लगाने की कोशिश कर हैं कि क्या आने वाले दिनों में खतरा और बढ़ सकता है।
इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) की स्थापना 1983 में की गई थी। यह हिंदूकुश-हिमालयी क्षेत्र के आठ देशों भारत, नेपाल, भूटान, चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश, म्यांमार और अफगानिस्तान के साथ काम करता है। काठमांडू स्थित यह संस्था हिमालयी क्षेत्र में पर्यावरण, ग्लेशियर, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं पर शोध करती है।
ICIMOD में जलवायु और पर्यावरणीय जोखिम विभाग के प्रमुख कियांगगोंग झांग ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि पिछले साल रसुवा बाढ़ से प्रभावित हुए इलाके फिर खतरे में हैं। लेंधे खोला में बर्फ के बड़े हिस्से के टूटकर गिरने को संभावित कारण माना जा रहा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। झांग ने कहा कि नेपाल-चीन सीमा के ऊपरी हिस्से में अब भी एक अवरोध मौजूद है, जिसके टूटने पर दूसरी बाढ़ आने का खतरा बना हुआ है।
वैज्ञानिकों ने बताया कि 2024 में जिस नदी बेसिन क्षेत्र में भारी बाढ़ आई थी, वही क्षेत्र फिर से खतरे का केंद्र बन गया है। शुरुआती आकलन के मुताबिक, बाढ़ ने नेपाल में एक बार फिर बुनियादी ढांचें और जल निगरानी प्रणालियों को भारी नुकसान पहुंचाया है। इसके अलावा नदी के किनारे बसे समुदायों और बस्तियों पर भी खतरा बढ़ गया है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन हिमालयी क्षेत्र के ग्लेशियरों, बर्फ, पर्माफ्रॉस्ट और पर्वतीय ढलानों को प्रभावित कर रहा है। हालांकि, भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ में जलवायु परिवर्तन की भूमिका कितनी रही, इसे लेकर अभी किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। इस घटना के कारणों को समझने के लिए हाइड्रोलॉजिकल, भूकंपीय और सैटेलाइट आंकड़ों का विश्लेषण किया जा रहा है।
फिलहाल सबसे बड़ी चिंता ऊपरी क्षेत्र में बने संभावित अवरोध की स्थिरता को लेकर है। भोटेकोशी और त्रिशूली नदी घाटियों के आसपास रहने वाले लोगों के लिए खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। ICIMOD की ओर से दूसरी संभावित बाढ़ की चेतावनी के बाद निगरानी बढ़ा दी गई है और राहत-बचाव अभियान को तेज कर दिया गया है।