

Navi Pillay Nobel Prize: दक्षिण अफ्रीका में जन्मीं भारतीय मूल की न्यायविद नवनीतम ‘नवी’ पिल्लै को 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया है। नॉर्वे की नोबेल समिति ने अंतरराष्ट्रीय न्याय को बढ़ावा देने और अंतरराष्ट्रीय कानून को मजबूत करने के उनके प्रयासों के लिए यह सम्मान दिया है। पिल्लै ने रंगभेद के दौर में राजनीतिक कार्यकर्ताओं का बचाव किया और बाद में अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण तथा संयुक्त राष्ट्र में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।
नवी पिल्लै के करियर के सबसे अहम पड़ावों में रवांडा नरसंहार से जुड़े मुकदमों की सुनवाई शामिल है। 1994 में रवांडा में तुत्सी समुदाय के लोगों की बड़े पैमाने पर हत्या की गई थी। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र ने जिम्मेदार लोगों पर मुकदमा चलाने के लिए अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण बनाया।
इस न्यायाधिकरण में पिल्लै ने जज के रूप में काम किया। उनके कार्यकाल के दौरान जीन-पॉल अकायेसु से जुड़े ऐतिहासिक मुकदमे में अदालत ने माना कि यदि किसी समुदाय को नष्ट करने के इरादे से बलात्कार किया जाता है, तो वह नरसंहार का कृत्य हो सकता है। इस फैसले ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक कानून में यौन हिंसा को समझने और उस पर कार्रवाई करने के लिए महत्वपूर्ण मिसाल कायम की।
नवनीतम नवी पिल्लै का जन्म दक्षिण अफ्रीका के डरबन में भारतीय तमिल मूल के परिवार में हुआ था। उनका करियर वकालत, न्यायपालिका और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों के क्षेत्र में फैला हुआ है। नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किए जाने के साथ उनके लंबे कानूनी और मानवाधिकार संबंधी योगदान को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है।
1. रंगभेद के खिलाफ कानूनी लड़ाई
दक्षिण अफ्रीका में वकालत के दौरान नवी पिल्लै ने रंगभेद का विरोध करने वाले कई कार्यकर्ताओं का बचाव किया। उन्होंने राजनीतिक कैदियों के अधिकारों और निष्पक्ष कानूनी प्रक्रिया के लिए भी काम किया।
2. दक्षिण अफ्रीका में रचा इतिहास
1967 में पिल्लै नटाल प्रांत में वकालत शुरू करने वाली पहली महिला बनीं। बाद में वह दक्षिण अफ्रीका के हाई कोर्ट में जज बनने वाली पहली अश्वेत महिला भी बनीं।
3. रवांडा नरसंहार के मुकदमों में अहम भूमिका
1995 में पिल्लै को रवांडा के लिए गठित अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण में जज नियुक्त किया गया। उन्होंने 1999 से 2003 तक इसकी अध्यक्ष के रूप में भी काम किया। इस दौरान नरसंहार और यौन हिंसा से जुड़े मामलों में उनके योगदान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली।
4. अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय में न्यायाधीश
2003 में पिल्लै अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) की न्यायाधीश चुनी गईं और अगस्त 2012 तक इस पद पर रहीं। इस भूमिका में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्याय के क्षेत्र में काम किया।
5. संयुक्त राष्ट्र में मानवाधिकारों की रक्षा
2008 से 2014 तक पिल्लै ने संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने दुनिया भर में मानवाधिकारों के उल्लंघन, भेदभाव और गंभीर अपराधों के लिए जवाबदेही तय करने पर जोर दिया।