न ज्यादा तनाव हो, न बहुत ज्यादा दोस्ती... अमेरिका-चीन रिश्तों पर बोले एस. जयशंकर

Munich Conference Speech: म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि अमेरिका और चीन के बीच संतुलन आवश्यक है। बदलती वैश्विक व्यवस्था में मध्यम ताकतें नए विकल्प चुन रही हैं।
Munich Conference Geopolitics Speech
विदेश मंत्री एस. जयशंकर(सोर्स- सोशल मीडिया)
Published on: 
Updated on: 

Munich Conference Geopolitics Speech: म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन (Munich Security Conference) में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने वैश्विक राजनयिक स्थिति पर अपनी बात रखी। विदेश मंत्री ने अमेरिका और चीन के बीच चल रही प्रतिद्वंद्विता की तुलना संतुलित 'गोल्डीलॉक्स स्थिति' से की।

उन्होंने कहा कि अमेरिका और चीन के संबंधों में न तो अत्यधिक तनाव होना चाहिए और न ही बहुत ज्यादा घनिष्ठता। डॉ. जयशंकर ने सवाल उठाया कि इस वैश्विक खींचतान के बीच उभरती और मध्यम शक्तियों का भविष्य क्या होगा।

उन्होंने कहा कि आज देश केवल अर्थव्यवस्था या सुरक्षा ही नहीं, बल्कि सप्लाई चेन को भी मजबूत बना रहे हैं। उभरती व मध्यम शक्तियां साझा मुद्दों पर नए गठजोड़ बनाकर एक-दूसरे के साथ तालमेल बिठा रही हैं।

अमेरिका-चीन प्रतिद्वंद्विता और गोल्डीलॉक्स स्थिति का सिद्धांत

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर अनुसार म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में अमेरिका और चीन की बढ़ती प्रतिस्पर्धा पर व्यापक चर्चा हुई। जयशंकर ने कहा कि अमेरिका-चीन संबंधों में एक गोल्डीलॉक्स स्थिति होनी चाहिए, जहां रिश्तों में न बहुत अधिक तनाव हो और न बहुत अधिक दोस्ती।

उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में दुनिया के ज्यादातर देश हर मोर्चे पर अपने राष्ट्रीय हितों को सुरक्षित करने में लगे हुए हैं। विभिन्न देश केवल अर्थव्यवस्था व सुरक्षा तक सीमित न रहकर अपनी सप्लाई चेन को भी पहले से कहीं अधिक मजबूत बना रहे हैं।

सीमित सहमति पर आधारित सहयोग और नई विश्व व्यवस्था

जयशंकर अनुसार आज के दौर में सभी देशों की सोच एक जैसी होने या उनके हित पूरी तरह मिलने की उम्मीद करना अव्यवहारिक है। अगर विभिन्न देशों के बीच केवल कुछ ही मुद्दों पर आपसी सहमति बनती है, तो साथ मिलकर काम करने हेतु उतना ही काफी माना जाएगा।

जोखिम घटाने और नए विकल्प तलाशने की इसी निरंतर कोशिश से वैश्विक स्तर पर धीरे-धीरे एक नई विश्व व्यवस्था का निर्माण हो रहा है। अगर उभरती व मध्यम ताकतों में सीधा टकराव न हो, तो वे आपस में सहयोग बढ़ाने के साथ अमेरिका व चीन दोनों संग मिलकर काम करेंगी।

Munich Conference Geopolitics Speech
म्यूनिख में बोले जयशंकर: संकट में रूस ने दिया भारत का साथ, अमेरिका-चीन तनाव को लेकर कही ये बड़ी बात
Munich Conference Geopolitics Speech
ट्रंप ने बनाई 'सुपर इंटेलिजेंस फोर्स' जानिए कैसे नेक्स्ट-जेन AI में दबदबा कायम करेगा अमेरिका

बहु-संरेखण, तीसरा रास्ता और बहुपक्षवाद की चुनौतियां

विदेश मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अब 'तीसरा रास्ता' अपवाद के बजाय एक आम व्यवहार व रिवाज बनता जा रहा है। जो देश पहले मुख्य खेमों में सुरक्षित महसूस करते थे, वे भी अब तीसरे विकल्प पर अधिक गंभीरता से विचार कर रहे हैं।

आज की आपस में जुड़ी दुनिया में दूसरों से पूरी तरह कट जाना संभव नहीं है, इसलिए जुड़े रहकर अपने विकल्प खुले रखना ही मुख्य चुनौती है। जयशंकर अनुसार आने वाले समय में बहु-संरेखण की सोच और मजबूत होगी, जिससे कठिन ताकतों से भी रिश्ते बनाए रखने होंगे।

यह एक तरह से जोखिम से बचाव करते हुए आगे बढ़ने की सोची-समझी रणनीति है, जिसका सीधा असर वैश्विक बहुपक्षवाद पर पड़ेगा। संयुक्त राष्ट्र जैसा मुख्य बहुपक्षीय मंच पहले से ही गतिरोध झेल रहा है, ऐसे में देखना होगा कि इस रणनीति का क्या प्रभाव पड़ता है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com