Explainer: नेपाल में कुदरत का कहर... या चीन का बिछाया जाल, आखिर एक्सपर्ट क्यों उठा रहे सवाल? जानें सबकुछ

China Role in Nepal Disaster: नेपाल में आई भीषण बाढ़ पर एक्सपर्ट्स क्यों उठा रहे हैं सवाल? क्या यह सिर्फ प्राकृतिक आपदा थी या चीन के हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स और इंफ्रास्ट्रक्चर ने खतरा बढ़ाया?
china role in nepal natural disaster
नेपाल में तबाही के लिए चीन जिम्मेदार!(AI जेनरेटेड इमेज)
Published on
Updated on

China Role in Nepal Disaster: किसी भी प्राकृतिक आपदा के पीछे कोई न कोई वजह होती है। कई बार ये वजह इंसान द्वारा खुद पैदा की जाती है। कभी अनजाने में तो कभी जानते हुए इंसान खुद ही प्राकृतिक आपदाओं को बुलावा देता है। चीन से सटे नेपाल सीमा पर स्थित कई गांवों को बहा देना वाली भीषण बाढ़ ने हिमालय में लोगों के सामने बढ़ते जोखिमों की एक भयावह याद के रूप में आई।

एक्सपर्ट्स का दावा है कि यह माउंटेन रेंज जलवायु परिवर्तन के कारण बहुत ही नाजुक स्थिति में पहुंच चुका है। नेपाल में आई इस भयवाह त्रासदी की असली वजह इतनी जल्दी तय नहीं की जा सकती है।

नेपाल आपदा पर वैज्ञानिकों की राय?

हालांकि, वैज्ञानिकों को कहना है कि बाढ़ से पहले और बाद की सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि तिब्बत के करीब लांगटांग लिरुंग माउंटेन के उत्तर में चट्टान का एक बड़ा हिस्सा टूट गया, जिससे उसके ऊपर मौजूद ग्लेशियर का एक बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे आ गया। गिरती हुई चट्टाने और बर्फ के करोड़ों क्यूबिक मीटर के मलबे की ताकत को शुरुआत में भूकंप समझ लिया गया था। अनुमान के अनुसार, इससे इतना एनर्जी पैदा हुआ कि ग्लेशियर की बर्फ पिघल गई और चट्टानों, कीच्चड़, पानी की एक बड़ी दीवार भोटेकोशी घाटी से होते हुए नेपाल में विनाशकारी बाढ़ का रूप ले लिया।

expert view on nepal disaster
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ पर वैज्ञानिकों की राय(AI जेनरेटेड इमेज)

नेपाल में आई इस आपदा ने ग्लेशियरों और पहाड़ी ढलानों से पैदा होने वाले खतरों को चिन्हित किया है, जो क्लाइमेट चेंज के कारण हो रहे हैं। कुछ एक्सपर्ट को यह भी चिंता है कि चीन का हाईड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स आपदा के रिस्क को और बढ़ा सकती हैं।

चीन पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?

नई दिल्ली स्थित सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च में प्रोफेसर और बर्लिन स्थित रॉबर्ट बॉश अकादमी में फेलो ब्रह्मा चेलानी ने इस आपदा के लिए चीन को जिम्मेदार मान रहे हैं। उनका कहना है कि नेपाल की त्रिशूली और भोटेकोशी वैली में तबाही मचाने वाली भीषण फ्लैश फ्लड को केवल हिमालय में हुई एक और त्रासदी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। यह घटना एक प्राकृतिक आपदा के रूप में शुरू हुई थी।

expert view on nepal disaster
चीन पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?(AI जेनरेटेड इमेज)

तिब्बत बॉर्डर के पास 5,200 मीटर की ऊंचाई पर ग्लेशियर के एक हिस्से को काटते हुए बर्फ और चट्टानों का एक विशाल हिमस्खलन हुआ। हालांकि, ऊपर की ओर तेजी से बदले जा रहे पहाड़ी लैंडस्केप से टकराने के बाद यह एक के बाद एक होने वाली विनाशकारी घटनाओं के रूप में बदल गई। लेकिन, सबसे बड़ा सवाल यह है कि नीचे की ओर आते-आते यह बाढ़ इतनी भयावह क्यों हो गई?

नेपाल में कैसे आई यह त्रासदी?

ब्रह्मा चेलानी के मुताबिक, चीन की ऊपरी हिस्से में मौजूद इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट, नदी के बदले रूप और सीमा-पार से सहयोग की कमी सामूहिक प्रभाव में छिपा है। इनमें से किसी भी ग्लेशियर के टूटने का कारण नहीं बनाया। हालांकि, ऐसी संभावना है कि इन सभी ने मिलकर इसके प्रभाव को और बढ़ाया होगा।

nepal natural disaster.
नेपाल में आई त्रासदी की तस्वीर(सोर्स- IANS)

चेलानी का कहना है कि पिछले एक दशक में चीन के तटबंधों, बॉर्डर फैसिलिटी, राजमार्गों और दूसरे निर्माण में बढ़ोतरी से ऊपरी घाटी के कुछ हिस्से संकरे हो गए हैं। निर्माण कार्य नदी के किनारों पर केंद्रित होती गई हैं। सामान्य परिस्थितियों में ऐसी परियोजनाएं ट्रेड और ट्रांसपोर्ट को सुविधाजनक बनाती हैं। लेकिन ज्यादा बाढ़ की स्थिति में यही प्रोजेक्स्ट बड़े जोखिम का कारण बन सकते हैं।

china role in nepal natural disaster
सोनू सूद पहुंचे नेपाल, बाढ़ पीड़ितों के लिए बांटा खाना-कंबल, बोले- सिर्फ राहत नहीं, जिंदगी फिर संवारेंगे

चीन ने पड़ोसी देशों की चिंता बढ़ाई

चीन द्वारा यारलुंग त्सांगपो नदी पर दुनिया की सबसे बड़ी हाइड्रो इलेक्ट्रिसिटी प्रोजेक्ट बनाने की योजना पर एक्सपर्ट्स लगातार सवाल उठाते रहे हैं। चीन इस मेगा-डैम के पर्यावरणीय प्रभाव या नीचे की ओर रहने वाले लोगों के लिए पानी की सप्लाई पर संभावित असर को लेकर उठाए गए सवालों को नजरअंदाज करता रहा है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com