तिब्बत में तबाही के बीच चीन ने बहाल किया G216 हाईवे, 500 से अधिक लापता लोगों की तलाश तेज

Tibet Road Access: तिब्बत में विनाशकारी बाढ़ के एक सप्ताह बाद चीन ने नेपाल सीमा को जोड़ने वाले एकमात्र G216 राष्ट्रीय हाईवे को खोल दिया है ताकि भारी मशीनें मुख्य आपदा क्षेत्र तक पहुंच सकें।
Tibet Road Rescue Operations
चीन ने बहाल किया G216 हाईवे (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Tibet Road Rescue Operations: चीन-नेपाल सीमा पर स्थित तिब्बत के आपदा प्रभावित इलाके में राहत और बचाव कार्यों को बड़ी मजबूती मिली है। विनाशकारी बाढ़ और मलबे के बहाव से क्षतिग्रस्त G216 राष्ट्रीय राजमार्ग को चीनी प्रशासन ने दोबारा खोल दिया है। यह महत्वपूर्ण मार्ग जिरोंग सीमा क्षेत्र को जोड़ता है और दोनों देशों के बीच आवाजाही व व्यापार के लिए अहम माना जाता है। सड़क खुलने के बाद भारी मशीनें और आधुनिक बचाव उपकरण अब सीधे मुख्य आपदा क्षेत्र तक पहुंच रहे हैं।

26 अगस्त की आपदा में बह गए थे हाईवे के कई हिस्से

गत 26 अगस्त को सीमावर्ती पर्वतीय क्षेत्र में एक विशाल ग्लेशियर के अचानक टूटने के बाद भारी तबाही मच गई थी। इसके कारण नदी प्रणालियों में कीचड़युक्त बाढ़ और मलबे का तेज बहाव शुरू हो गया था।

इस प्राकृतिक आपदा की चपेट में G216 राष्ट्रीय राजमार्ग के कई हिस्से बह गए थे। सड़क संपर्क टूटने के कारण बचाव दलों के लिए मुख्य आपदा क्षेत्र तक भारी उपकरण पहुंचाना बेहद मुश्किल हो गया था।

संकरी पहाड़ियों, उफनती नदी और लगातार खराब मौसम के बीच चीनी राहत दलों ने चौबीसों घंटे काम कर सड़क को बहाल किया। लगातार भूस्खलन और चट्टानें खिसकने के खतरे के बावजूद मार्ग को दोबारा खोलने का काम पूरा किया गया।

हेलीकॉप्टरों से पहुंचाई गई राहत सामग्री

सड़क बंद रहने के दौरान सीमा क्षेत्र में तैनात राहत कर्मियों तक जरूरी खाद्य सामग्री और आपातकालीन उपकरण हेलीकॉप्टरों के जरिए पहुंचाए जा रहे थे। कई दुर्गम स्थानों पर एयरड्रॉपिंग के माध्यम से राहत अभियान जारी रखा गया।

अब G216 राष्ट्रीय राजमार्ग खुलने के बाद बड़ी संख्या में भारी एक्सावेटर और अन्य मशीनें उस क्षेत्र तक पहुंच चुकी हैं, जहां चीनी सीमा निरीक्षण परिसर स्थित था। इससे मलबा हटाने और फंसे लोगों तक पहुंचने का काम तेज होने की उम्मीद है।

सर्च डॉग और आधुनिक उपकरणों से तलाश जारी

राहत कर्मी अब आधुनिक जीवन-रक्षक और खोज उपकरणों की मदद से मलबे में दबे लोगों की तलाश कर रहे हैं। विशेष रूप से प्रशिक्षित खोजी कुत्तों को भी अभियान में शामिल किया गया है।

सर्च टीमें नदी किनारों, गहरी खाइयों और क्षतिग्रस्त सड़क गलियारों में लगातार तलाश कर रही हैं। कीचड़ और मलबे की मोटी परतों के बीच किसी भी संभावित जीवित व्यक्ति का पता लगाने के लिए वैज्ञानिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

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16 मौतें, 546 लोग अब भी लापता

तिब्बत में इस प्रलयंकारी आपदा के बाद अब तक 16 लोगों की मौत की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है। वहीं, 546 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश के लिए सेना और विशेष राहत एजेंसियां लगातार अभियान चला रही हैं।

लापता लोगों में 23 देशों के 261 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। उनकी तलाश को लेकर सीमा क्षेत्र में बचाव अभियान लगातार जारी है।

सीमा के दूसरी ओर नेपाल भी इस आपदा से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। वहां बाढ़ से मरने वालों की संख्या बुधवार को एक हजार से अधिक पहुंच चुकी है। दोनों देशों के अधिकारी प्रभावित परिवारों को राहत और सहायता पहुंचाने के साथ लापता लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं।

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