जेब पर भारी पड़ेगा अब हवाई टिकट! मीडिल ईस्ट तनाव से एयरलाइंस इंडस्ट्री पर मंडराया खतरा, IATA ने जताई चिंता

Global Aviation Downturn: आईएटीए की रिपोर्ट के अनुसार, मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के कारण अप्रैल 2026 में वैश्विक हवाई यात्री मांग में 3.4% की गिरावट आई है, जिससे एविएशन सेक्टर पर संकट गहरा गया है।
Air Tickets Set to Become Heavier on the Pocket! Threat Looms Over Airline Industry Due to Middle East Tensions; IATA Expresses Concern.
सांकेतिक एआई फोटो
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Global Aviation Downturn In Middle East War: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और जंग की भीषण लपटों ने अब वैश्विक एविएशन सेक्टर को बुरी तरह झकझोर कर रख दिया है। इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) द्वारा जारी हालिया आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2026 में वैश्विक हवाई यात्री मांग में सालाना आधार पर 3.4 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। यह कमी मुख्य रूप से संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में उड़ानों की असुरक्षा और यात्रियों की कमी के कारण देखी जा रही है।

वैश्विक यात्री मांग और क्षमता में भारी कमी

आईएटीए की रिपोर्ट में बताया गया है कि एविएशन सेक्टर के लिए मौजूदा समय काफी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। विमानन जगत में यात्री संख्या को मापने वाले पैमाने 'रेवेन्यू पैसेंजर किलोमीटर' के आधार पर कुल यात्री मांग पिछले साल के मुकाबले 3.4 प्रतिशत नीचे गिर गई है। इसके साथ ही, उपलब्ध सीट किलोमीटर के आधार पर मापी जाने वाली एयरलाइंस की कुल क्षमता में भी 2.9 प्रतिशत की सालाना गिरावट आई है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि न केवल यात्री कम हुए हैं बल्कि एयरलाइंस को अपनी उड़ानों की संख्या में भी कटौती करनी पड़ी है।

मीडिल ईस्ट में सबसे बड़ा झटका

जंग का सबसे बड़ा असर मीडिल ईस्ट की एयरलाइंस पर पड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय यात्री मांग में 46.6 प्रतिशत की जबरदस्त गिरावट देखी गई है। यदि केवल अप्रैल महीने के आंकड़ों पर गौर करें, तो इस क्षेत्र की यात्री मांग सालाना आधार पर 48.1 प्रतिशत तक लुढ़क गई है। यात्री संख्या घटने के साथ-साथ इस क्षेत्र की विमान क्षमता में भी 38.4 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। दिलचस्प बात यह है कि यदि मीडिल ईस्ट के प्रभावित क्षेत्र को अलग कर दिया जाए, तो वैश्विक स्तर पर यात्री मांग में वास्तव में 1.2 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी देखने को मिलती। आईएटीए ने बताया कि वैश्विक लोड फैक्टर 83.1 प्रतिशत रहा है जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 0.4 प्रतिशत कम है। वहीं, जंग से प्रभावित मध्य पूर्व के क्षेत्र में लोड फैक्टर गिरकर महज 70.1 प्रतिशत पर आ गया है।

महंगा हुआ हवाई सफर

हवाई यात्रियों के लिए एक और चिंताजनक खबर यह है कि जंग के कारण वैश्विक तेल बाजार में भारी अस्थिरता है। आईएटीए के महानिदेशक विली वॉल्श ने आगे बताया कि अप्रैल में जेट फ्यूल की कीमतें पिछले साल के मुकाबले दोगुनी से अधिक बढ़ गई हैं। ईंधन की इस बेतहाशा वृद्धि का सीधा असर हवाई किरायों पर पड़ा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा आम लोगों की पहुंच से दूर और काफी महंगी हो गई है।

सेवाओं और रूटों में कटौती

विली वॉल्श के अनुसार, आने वाले महीनों में एयर ट्रांसपोर्ट सेक्टर की स्थिति बेहद अस्थिर और अनिश्चित बनी रहने वाली है। मौजूदा डेटा संकेत दे रहे हैं कि कई प्रमुख एयरलाइंस कंपनियां कमजोर मांग और ईंधन की बढ़ती लागत को देखते हुए अपनी सेवाओं और रूटों में कटौती कर रही हैं।

रिपोर्ट में यह भी है कि ईरान के साथ जारी युद्ध की वजह से इस क्षेत्र में हवाई यातायात लगातार प्रभावित हो रहा है। हालांकि, युद्धविराम लागू होने के बाद गिरावट की रफ्तार में मामूली कमी जरूर आई है, लेकिन पूर्ण सुधार की राह अब भी काफी चुनौतीपूर्ण नजर आ रही है।

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