

Highlights
भारत-चीन सीमा पर फिर से तनाव की स्थिति बन रही है
चीनी सेना पर गश्ती पैटर्न तोडऩे का आरोप लग रहा है
भारत का चीन सेना के साथ कई बाई आमना-सामना हुआ है
India-China Border Dispute: भारत ने शुक्रवार एलएसी यानी भारत-चीन बॉर्डर को लेकर बड़ा बयान दिया है। भारत ने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर स्थिति तब बिगड़ जाती है जब चीनी सैनिक तय गश्ती पैटर्न से हट जाते हैं और उसने अपने इस घोषित रुख को दोहराया कि सीमा पर शांति और स्थिरता द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नियमित मीडिया ब्रीफिंग में ये टिप्पणियां कीं, एक दिन बाद जब भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने संकेत दिया कि हाल के दिनों में अरुणाचल प्रदेश में सीमा के कई स्थानों पर चीनी सेना के साथ आमना-सामना हुआ था।
शत्रुजीत कपूर ने गुरुवार को राजस्थान के अलवर स्थित एक बेस पर सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले कुछ दिनों में अरुणाचल प्रदेश के कई स्थानों पर झड़पें हुईं और यह सिलसिला अभी भी जारी है। आईटीबीपी एलएसी के कुछ हिस्सों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार प्रमुख बलों में से एक है।
उन्होंने यह भी बताया कि ‘चल रही झड़पों’ के दौरान आईटीबीपी के एक नए बल, शौर्य कमांडो को तैनात किया गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि आईटीबीपी ने सभी सीमा इकाइयों के लिए ड्रोन प्लाटून तैयार किए हैं और 2020 में गलवान घाटी जैसी लड़ाइयों से निपटने के लिए एक नया स्ट्राइक कोर्स तैयार किया है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कपूर की टिप्पणियों का सीधे तौर पर जिक्र नहीं किया, लेकिन स्वीकार किया कि चीनी सेनाओं द्वारा स्थापित गश्ती पैटर्न से हटकर गश्त करना ही एलएसी पर स्थिति के अशांत होने का मुख्य कारण है।
उन्होंने कहा कि मैं इस बात पर भी जोर देना चाहूंगा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास के लिए आवश्यक है।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत और चीन एलएसी पर लंबित मुद्दों को सुलझाने और गलतफहमी व गलत अनुमान से बचने के लिए मौजूदा राजनयिक और सैन्य तंत्र का उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि दोनों पक्ष बेहतर सीमा प्रबंधन के लिए उपयुक्त क्षेत्रों में एलएसी की बेहतर समझ विकसित करने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए सहमत हुए हैं।
भारत और चीन ने 6 और 7 सितंबर को अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र में सैन्य कमांडरों के बीच वार्ता का पहला दौर आयोजित किया था