चागोस द्वीप विवाद, मॉरीशस ने मालदीव से तोड़े कूटनीतिक रिश्ते (सोर्स- सोशल मीडिया)
Mauritius Cuts Ties With Maldives: हिंद महासागर के दो मित्र देशों, मॉरीशस और मालदीव के बीच रिश्तों में अचानक कड़वाहट आ गई है और शांति भंग होती दिख रही है। चागोस द्वीप समूह की संप्रभुता को लेकर पैदा हुए मतभेदों ने अब एक बहुत बड़ा राजनयिक संकट खड़ा कर दिया है। अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सीमा विवाद के इस दौर में मॉरीशस ने मालदीव से अपने सभी संबंध तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिए हैं। यह कड़ा फैसला मालदीव के राष्ट्रपति मुइज्जू द्वारा चागोस पर किए गए नए दावों और कड़े रुख के बाद लिया गया है।
मॉरीशस के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार, 27 फरवरी को एक आधिकारिक बयान जारी कर इस बड़े कूटनीतिक कदम की जानकारी साझा की है। मंत्रालय का कहना है कि मालदीव सरकार ने हाल ही में चागोस द्वीप समूह को लेकर अपनी पुरानी नीति और स्थिति बदल ली है। अब मालदीव इस क्षेत्र पर मॉरीशस की संप्रभुता को मानने से इनकार कर रहा है जिससे दोनों देशों में गहरा तनाव पैदा हो गया है।
मालदीव के राष्ट्रपति मुइज्जू ने अपने ‘स्टेट ऑफ द नेशन’ संबोधन में चागोस पर अपना मजबूत दावा पेश करते हुए इस विवाद को हवा दी। उन्होंने साल 2022 में मालदीव की पिछली सरकार द्वारा मॉरीशस की संप्रभुता को दी गई मान्यता को भी पूरी तरह से वापस ले लिया है। मुइज्जू का कहना है कि यह बदलाव मालदीव के समुद्री हितों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है और वे पीछे नहीं हटेंगे।
चागोस द्वीप समूह हिंद महासागर के बीच में स्थित 60 छोटे द्वीपों का एक समूह है जो सामरिक रूप से दुनिया के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। साल 1965 में ब्रिटेन ने मॉरीशस को आजादी देने से पहले चागोस को उससे अलग कर एक नया क्षेत्र घोषित कर दिया था। इसके बदले में मॉरीशस को केवल 30 लाख पाउंड का मुआवजा दिया गया था जिसे मॉरीशस हमेशा से दबाव में लिया गया फैसला मानता है।
ब्रिटेन ने इसके बाद डिएगो गार्सिया द्वीप को एक बड़े सैन्य अड्डे के निर्माण के लिए अमेरिका को लंबे समय के पट्टे पर दे दिया था। सैन्य अड्डा बनाने के लिए वहां रहने वाले लगभग 1,500 से 2,000 मूल निवासियों को उनके घरों से जबरन बेदखल कर दूसरी जगह भेज दिया गया। ये लोग आज भी अपने घर लौटने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी और मानवाधिकार की एक बहुत लंबी लड़ाई लड़ रहे हैं।
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साल 2019 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) ने अपने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा था कि चागोस को मॉरीशस से अलग करना पूरी तरह गैर-कानूनी था। संयुक्त राष्ट्र ने भी ब्रिटेन को यह द्वीप जल्द से जल्द मॉरीशस को वापस सौंपने का निर्देश दिया था जिसके बाद हाल ही में एक समझौता हुआ। हालांकि इस नए समझौते में डिएगो गार्सिया पर अमेरिकी सैन्य बेस को अगले 99 साल तक बनाए रखने की बात कही गई है।
अब मालदीव ने ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच हुए इसी नए समझौते पर अपनी औपचारिक आपत्ति दर्ज करा दी है जिससे माहौल बिगड़ गया। मालदीव को लगता है कि इससे उसकी समुद्री सीमा और आर्थिक हितों पर बुरा असर पड़ सकता है जिसके कारण यह टकराव और अधिक बढ़ गया है। मॉरीशस ने अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए मालदीव के साथ संबंधों को पूरी तरह खत्म करना ही फिलहाल बेहतर समझा है।