

Lebanon-Israel Permanent Peace Agreement: लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन के हालिया बयान ने देश की मौजूदा राजनीतिक और सुरक्षा स्थिति को और अधिक स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने संकेत दिया है कि इजरायल के साथ संघर्ष विराम के बाद अब लेबनान केवल अस्थायी शांति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि एक स्थायी और व्यापक समझौते की दिशा में बातचीत करेगा। यह कदम देश में लंबे समय तक स्थिरता, सुरक्षा और संप्रभुता सुनिश्चित करने के प्रयासों का हिस्सा माना जा रहा है।
राष्ट्रपति आउन ने कहा कि अब प्राथमिकता केवल युद्धविराम बनाए रखने की नहीं है, बल्कि एक ऐसा ढांचा तैयार करने की है जो भविष्य में किसी बड़े संघर्ष को रोक सके और देश में स्थायी शांति स्थापित कर सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह प्रक्रिया लेबनान के राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए है और इसका उद्देश्य नागरिकों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
उन्होंने देश के भीतर एकता की अपील भी की और कहा कि सभी राजनीतिक और सामाजिक पक्षों को सरकार, संविधान और सेना के नेतृत्व में एकजुट रहना चाहिए। उनका मानना है कि आंतरिक विभाजन और बाहरी हस्तक्षेप देश की स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बन सकते हैं। जोसेफ आउन ने इसके साथ ही इजरायली हमलों को रोकने, सेना की वापसी सुनिश्चित करने और विस्थापित नागरिकों की सुरक्षित वापसी को प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य का नियंत्रण सभी क्षेत्रों में पूरी तरह बहाल किया जाना चाहिए ताकि शासन व्यवस्था मजबूत हो सके।
दूसरी ओर, हिजबुल्लाह ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने हथियारों को लेकर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा, जब तक इजरायल अपनी सैन्य मौजूदगी समाप्त नहीं करता और संबंधित मुद्दों का समाधान नहीं होता। इस रुख ने स्थिति को और जटिल बना दिया है और भविष्य की शांति प्रक्रिया को चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
वहीं, इजरायल की ओर से भी यह संकेत मिला है कि उसके सैन्य अभियान अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं, जिससे तनाव बना हुआ है। मौजूदा स्थिति केवल युद्धविराम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक गहरे राजनीतिक और रणनीतिक संकट का हिस्सा है, जिसके समाधान के लिए व्यापक बातचीत और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता होगी।