

Iran Stop Support to Hamas and Hezbollah: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दावा किया है कि ईरान (Iran) मिडिल ईस्ट में सक्रिय अपने सहयोगी और छद्म संगठनों, खासकर हमास और हिजबुल्लाह को समर्थन देना बंद करने पर सहमत हो गया है। एक इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने कहा कि ईरान ने व्यापक स्तर पर कई मुद्दों पर सहमति जताई है, जिसमें इन संगठनों को मिलने वाली आर्थिक और सैन्य सहायता रोकना भी शामिल है।
उनका यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच संभावित परमाणु समझौते और क्षेत्रीय तनाव कम करने को लेकर बातचीत तेज हो रही है। मिडिल ईस्ट में हाल के घटनाक्रम इस दावे को और महत्वपूर्ण बना देते हैं।
लेबनान-इजराइल सीमा पर हाल ही में हुए संघर्ष के बाद हिजबुल्लाह ने युद्धविराम के बावजूद आक्रामक रुख बनाए रखने के संकेत दिए हैं। संगठन ने चेतावनी दी कि उसके लड़ाके पूरी तरह सतर्क हैं और किसी भी स्थिति के लिए तैयार हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि क्षेत्र में शांति की स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है। विश्लेषकों का मानना है कि ईरान (Iran) का रुख बदलना कूटनीतिक दबाव और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का परिणाम हो सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान बातचीत के जरिए तनाव कम करने और आर्थिक प्रतिबंधों से राहत पाने के विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रहा है।
डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका और ईरान के बीच सीधे संवाद का दूसरा दौर जल्द ही, संभवतः इसी सप्ताहांत, आयोजित हो सकता है। उन्होंने कहा कि ईरान समझौते के लिए इच्छुक दिख रहा है और वार्ता आगे बढ़ सकती है।
इस बीच, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि हिजबुल्लाह के खिलाफ सैन्य कार्रवाई पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के अनुरोध पर इजराइल ने लेबनान में अस्थायी युद्धविराम को स्वीकार किया, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। नेतन्याहू ने दावा किया कि इजराइली सेना ने हिजबुल्लाह के लगभग 90 प्रतिशत मिसाइल और रॉकेट भंडार को नष्ट कर दिया है, हालांकि संगठन को पूरी तरह खत्म करने का अभियान अभी जारी है।