

Kulgam Terror Attack: जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में आतंकियों ने एक बार फिर से अपनी कायराना हरकत को क्रूरता से अंजाम दिया है। आतंकवादियों ने छत्तीसगढ़ के रहने वाले दो निर्दोष और गरीब प्रवासी मजदूरों की गोली मारकर बेरहमी से हत्या कर दी है। ये दोनों मजदूर दक्षिण कश्मीर के केल्लम इलाके में एक ईंट-भट्ठे पर मेहनत मजदूरी करके अपना और अपने परिवार का जीवन चला रहे थे। आतंकियों ने अचानक उन पर अंधाधुंध गोलियां बरसाईं, जिससे पूरे इलाके में भारी दहशत और खौफ का माहौल बन गया है।
इस भयंकर गोलीबारी में एक मजदूर की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि दूसरे ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। वारदात के फौरन बाद मुस्तैद सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके को चारों तरफ से घेर लिया और एक बहुत बड़ा सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है।
यह बड़ा आतंकी हमला ऐसे बेहद संवेदनशील समय में हुआ है जब पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर यानी PoK में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। वहां पाकिस्तान की दमनकारी सरकार के खिलाफ लगातार उग्र विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं और आम जनता सड़कों पर उतरी हुई है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या कुलगाम में हुए इस कायराना हमले और PoK के खराब हालातों के बीच कोई सीधा संबंध है। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने अभी तक आधिकारिक रूप से ऐसा कोई भी सीधा नाता या संबंध स्पष्ट नहीं किया है। लेकिन सुरक्षा मामलों से जुड़े तमाम जानकार और विशेषज्ञ लंबे समय से पाकिस्तान की इस पुरानी नापाक चाल को अच्छी तरह से समझते आए हैं। उनका स्पष्ट रूप से मानना है कि जब भी पाकिस्तान किसी बड़े अंदरूनी संकट में फंसता है, तो वह कश्मीर में आतंकवाद और तनाव बढ़ाता है।
इन दिनों PoK के तमाम इलाकों में लोग अपनी भारी आर्थिक तकलीफों को लेकर पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पिछले चार दिनों में 50 नागरिकों की मौत के बाद वहां हालात बहुत ही ज्यादा खराब और पूरी तरह से बेकाबू हो चुके हैं।
पाकिस्तान सरकार इस बड़े कत्लेआम और अपनी भारी नाकामी से पूरी दुनिया का ध्यान भटकाने के लिए कश्मीर में ऐसे हमले करवा रही है। विश्लेषकों का मानना है कि यह कुलगाम की घटना भी पाकिस्तान की उसी व्यापक और बहुत ही पुरानी रणनीति का अहम हिस्सा है।
अब एक बहुत ही अहम सवाल यह भी है कि आतंकवादियों ने फिर से बाहरी और गरीब प्रवासी मजदूरों को ही अपना मुख्य निशाना क्यों बनाया। दरअसल कश्मीर में मौजूद आतंकी संगठन हमेशा ऐसे आसान और कमजोर लक्ष्य चुनते रहे हैं जिनसे इलाके में बहुत ज्यादा और तेजी से दहशत फैले।
ये बाहरी प्रवासी मजदूर कश्मीर घाटी की स्थानीय अर्थव्यवस्था का एक बहुत ही बड़ा और बेहद अहम हिस्सा माने जाते हैं। इसलिए उन पर सीधा जानलेवा हमला करके आतंकी वहां के शांत माहौल में डर पैदा करना और अर्थव्यवस्था को गहरी चोट पहुंचाना चाहते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसे कायराना और खौफनाक हमलों के पीछे आतंकियों के कई बड़े और नापाक मकसद बहुत ही स्पष्ट रूप से छिपे हो सकते हैं। पहला और सबसे बड़ा मकसद घाटी में हालात सामान्य होने की बेहतरीन छवि को नुकसान पहुंचाना और बाहरी लोगों में भारी डर बैठाना है।
इसके अलावा वे भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान बांटना और कश्मीर के इस मुद्दे को फिर से अंतरराष्ट्रीय मंच पर किसी भी तरह चर्चा में लाना चाहते हैं। जम्मू-कश्मीर में साल 2019, 2021 और 2022 में भी प्रवासी मजदूरों पर इसी तरह के कई बड़े और जानलेवा हमले हो चुके हैं।
यह ताजा कुलगाम हमला करीब 21 महीने के लंबे अंतराल के बाद प्रवासी मजदूरों को निशाना बनाकर किया गया सबसे बड़ा आतंकी हमला माना जा रहा है। इस दर्दनाक हमले के बाद पूरे देश के नागरिकों में भारी गुस्सा है और लोग हत्यारे आतंकियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
फिलहाल भारतीय सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे मामले की बहुत ही बारीकी और गहराई से जांच करने में अपनी जी जान से जुटी हुई हैं। सेना और पुलिस के जवान चप्पे-चप्पे पर तलाशी ले रहे हैं ताकि आतंकियों को जहन्नुम पहुंचाया जा सके।