International Education Day : जानिए क्यों मनाते हैं अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, हर साल क्यों रखी जाती है एक अलग थीम?

हर साल 24 जनवरी को शिक्षा के महत्व को पहचानने और दुनिया में शांति और विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इंटरनेशनल डे ऑफ एजुकेशन मनाया जाता है। इस साल इसकी थीम है 'एआई और शिक्षा'।
International Education Day : जानिए क्यों मनाते हैं अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, हर साल क्यों रखी जाती है एक अलग थीम?
अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, फोटो ( सो. सोशल मीडिया )
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नवभारत डेस्क: हर साल, शिक्षा के महत्व को पहचानने और दुनिया में शांति और विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इंटरनेशनल डे ऑफ एजुकेशन मनाया जाता है। यह दिन संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) द्वारा निर्धारित किया गया, जिसका उद्देश्य सभी के लिए समावेशी, न्यायसंगत और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देना है।

इस दिन को मनाने का मकसद यह है कि शिक्षा के जरिए समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई जाए। यह दिन दुनिया को याद दिलाता है कि शिक्षा न केवल व्यक्तिगत विकास बल्कि वैश्विक समृद्धि का भी आधार है।

मानवता और शिक्षा के भविष्य पर फोकस

हर साल 24 जनवरी को 'इंटरनेशनल डे ऑफ एजुकेशन' के रूप में मनाया जाता है। इस साल, यह दिवस अपनी सातवीं वर्षगांठ मना रहा है। 2025 के इस विशेष अवसर का थीम है 'एआई और शिक्षा: ऑटोमेशन की दुनिया में मानव शक्ति की रक्षा'।

यह थीम शिक्षा में तकनीकी विकास और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते प्रभाव को समझने और मानवता की भूमिका को सुरक्षित रखने पर जोर देती है। इस दिन का उद्देश्य शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका को पहचानना और उसे हर व्यक्ति के लिए सुलभ बनाना है। एआई और ऑटोमेशन के युग में, शिक्षा का मकसद न केवल ज्ञान प्रदान करना है, बल्कि छात्रों को ऐसा कौशल और समझ विकसित करना है जिससे वे तकनीकी चुनौतियों का सामना कर सकें और समाज में सकारात्मक योगदान दे सकें।

शिक्षा दिवस के सफर को 59 देशों ने अपनाया

3 दिसंबर, 2018 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने शिक्षा के महत्व को मान्यता देते हुए एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया। इस प्रस्ताव के तहत "इंटरनेशनल डे ऑफ एजुकेशन" मनाने का निर्णय लिया गया। इसके बाद 24 जनवरी, 2019 को पहली बार यह दिवस वैश्विक स्तर पर मनाया गया। अब तक 59 सदस्य देशों ने इस महत्वपूर्ण दिवस को मनाने का फैसला किया है, जो शिक्षा के प्रचार-प्रसार और इसके महत्व को उजागर करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

एआई और ऑटोमेशन का शिक्षा

तेजी से विकसित हो रही टेक्नोलॉजी के साथ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और ऑटोमेशन का प्रभाव उद्योगों, अर्थव्यवस्था और मानव जीवनशैली पर तेजी से बढ़ रहा है। यह विषय शिक्षा और भविष्य के कार्यबल पर इनके बढ़ते असर को उजागर करने के लिए चुना गया है। आज, एआई और ऑटोमेशन न केवल काम करने के तरीकों को बदल रहे हैं, बल्कि वे यह भी तय कर रहे हैं कि किस प्रकार की स्किल्स की आवश्यकता होगी। जैसे-जैसे ये तकनीकें आगे बढ़ रही हैं, वे शिक्षा प्रणाली में बदलाव की मांग कर रही हैं, ताकि नई पीढ़ी भविष्य के रोजगार बाजार में सफल हो सके।

पर्सनलाइज्ड एजुकेशन के अवसर

शिक्षा के क्षेत्र में एआई और ऑटोमेशन तकनीक का उपयोग, सीखने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने, शिक्षण विधियों में सुधार लाने और विद्यार्थियों को उनकी जरूरतों के अनुसार पर्सनलाइज्ड एजुकेशन प्रदान करने के नए अवसर उपलब्ध कराता है।

शिक्षा में सुधार के लिए कारगर

एआई-ड्रिवन डिवाइसेज छात्रों की विशिष्ट जरूरतों को समझकर उन्हें एक बेहतर और रुचिकर सीखने का अनुभव प्रदान कर सकते हैं। इससे न केवल शिक्षा अधिक प्रभावी बनती है, बल्कि छात्रों का जुड़ाव भी बढ़ता है। साथ ही, ऑटोमेशन की मदद से एडमिनिस्ट्रेटिव कार्यों को सरल बनाया जा सकता है। इससे शिक्षकों को छात्रों के साथ अधिक इंटरैक्टिव तरीके से जुड़ने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण में अपना समय लगाने का अवसर मिलता है।

मौलाना अबुल कलाम आजाद की विरासत को सम्मान

भारत हर साल 11 नवंबर को राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में मनाता है। यह दिन देश के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। मौलाना आजाद ने भारतीय शिक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने की पुरजोर वकालत की और समाज में उनके अधिकारों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। उनके प्रयास आज भी शिक्षा के क्षेत्र में प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं।

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