"युद्ध नहीं, तेल चाहिए!" ख्वाजा आसिफ ने उड़ाया अमेरिका का मजाक, ट्रंप के 15 पॉइंट वाले प्लान पर ईरान का इनकार

US-Iran Conflict: होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापार 95% गिरने के बाद अमेरिका ने इसे शांति प्रस्ताव का मुख्य हिस्सा बनाया है। पाकिस्तान ने अमेरिकी रणनीति पर सवाल उठाए, जबकि ईरान शर्तों पर अड़ा है।
Pakistan Mocks US on Iran War
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ (सोर्स- सोशल मीडिया)
Published on: 
Updated on: 

Pakistan Mocks US on Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने की मांग को अपने शांति प्रस्ताव का हिस्सा बनाया है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 15 पॉइंट वाला प्रस्ताव भेजा था। जिस पर ईरान ने बात करने से ही इनकार कर दिया। अब इसे लेकर पाकिस्तान ने अमेरिकी रणनीति का मजाक उड़ाया है।

पाकिस्तान को आम तौरपर अमेरिका का पक्षधर माना जाता है, इस बार भी पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार अमेरिका के साथ खड़ी नजर आ रही है। लेकिन इसी पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने वाशिंगटन के बदलते मकसद पर सवाल उठाते हुए कहा कि अमेरिका का असली लक्ष्य अब युद्ध से नहीं, बल्कि होर्मुज स्ट्रेट को खोलना बन गया है, जो कि पहले से ही खुला हुआ था।

वैश्विक व्यापार के लिए अहम है होर्मुज स्ट्रेट?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज तेल और गैस व्यापार के लिहाज से दुनिया का सबसे अहम मार्ग है। वैश्विक कच्चे तेल और लिक्विड प्राकृतिक गैस का लगभग पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में ईरान ने क्षेत्रीय हमले बढ़ाए और इस होर्मुज स्ट्रेट तक पहुंच को सख्ती से ब्लॉक कर दिया। इसका असर शिपिंग पर भी पड़ा रहा है।लॉइड्स लिस्ट के अनुसार, आमतौर पर प्रतिदिन लगभग 120 जहाज इस मार्ग से गुजरते हैं, लेकिन 1 से 25 मार्च के बीच केवल 155 बार ही पारगमन हुआ, यानी 95 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

अमेरिका में भेजा 15 पॉइंट का प्रस्ताव

वहीं युद्ध को खत्म करने की योजना पर भी चर्चा जारी है। अमेरिका ने 15 पॉइंट प्रस्ताव में ईरान से कई शर्तें रखी हैं, जिनमें प्रतिबंधों में ढील, परमाणु कार्यक्रम पर रोक हटाना, हमले रोकना और होर्मुज को खोलना शामिल है।

हालांकि, ईरान ने इसे खारिज कर दिया और अपने जवाबी प्रस्ताव में कहा कि युद्ध के नुकसान की भरपाई, नेताओं की हत्या पर रोक, दुश्मनी का लिखित अंत और होर्मुज पर ईरान का नियंत्रण बनाए रखना ही शांति की शर्त होगी। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी साफ कहा कि अभी तक किसी बातचीत की कोई योजना नहीं है।

युद्ध को जल्द खत्म करना चाहता है अमेरिका

इस स्थिति से साफ है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता शुरुआती चरण में ही अटकी हुई है। जबकि अमेरिका युद्ध को जल्दी खत्म करने की कोशिश कर रहा है, ईरान अपनी शर्तों पर ही बातचीत करने को तैयार है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com