Ayatollah Ali Khamenei का निधन… जानिए साधारण मौलवी से ईरान के 'सुप्रीम लीडर' बनने तक की पूरी दास्तां

Khamenei Life Story: अयातुल्ला अली खामेनेई का 86 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। साधारण परिवार में जन्मे खामेनेई ने 37 वर्षों तक ईरान की सत्ता संभाली और शिया राजनीति के सबसे बड़े चेहरा बने।
Ayatollah Ali Khamenei: The Journey from a Common Cleric to Iran's Supreme Leader
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Life Journey Of Iran Supreme Leader Ali Khamenei: ईरान के सबसे शक्तिशाली नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का अध्याय अब हमेशा के लिए समाप्त हो गया है। इजराइल और अमेरिकी हमलों में उनकी मृत्यु के बाद पूरे मध्य पूर्व में शोक की लहर दौड़ गई है। एक साधारण मौलवी से लेकर देश के सर्वोच्च पद तक पहुंचने का उनका सफर संघर्षों से भरा रहा। खामेनेई ने लगभग चार दशकों तक ईरान की दिशा तय की और दुनिया भर में शियाओं का नेतृत्व किया।

साधारण बचपन और धार्मिक शिक्षा

खामेनेई का जन्म 19 अप्रैल 1939 को ईरान के मशहद में एक बहुत ही साधारण मौलवी परिवार में हुआ था। उन्होंने बहुत ही कम उम्र में धार्मिक शिक्षा लेनी शुरू की और मात्र 11 साल की आयु में वे मौलवी बन गए। कुम शहर में उनकी मुलाकात अयातुल्ला खुमैनी से हुई जिन्होंने उनके जीवन के नजरिए को पूरी तरह बदलकर रख दिया।

क्रांति और जेल का लंबा संघर्ष

खामेनेई ने 1960 के दशक में ईरान के शाह के खिलाफ हुए प्रदर्शनों में बहुत ही सक्रिय भूमिका निभाई थी। शाह की पुलिस ने उन्हें छह बार गिरफ्तार कर जेल भेजा लेकिन उन्होंने अपनी विचारधारा का रास्ता कभी नहीं छोड़ा। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद वे नई सरकार के सबसे महत्वपूर्ण और भरोसेमंद स्तंभों में से एक बनकर उभरे।

घातक हमला और राष्ट्रपति पद

साल 1981 में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन पर बम से जानलेवा हमला हुआ जिसमें वे बाल-बाल बच गए। इस धमाके के कारण उनका दाहिना हाथ हमेशा के लिए पैरालाइज हो गया लेकिन उनका हौसला कभी भी कम नहीं हुआ। वे करीब 8 साल तक ईरान के राष्ट्रपति रहे और इराक के साथ चली भीषण जंग का मजबूती से नेतृत्व किया।

सुप्रीम लीडर और परमाणु शक्ति

1989 में खुमैनी के निधन के बाद उन्हें सर्वसम्मति से ईरान का नया सर्वोच्च नेता यानी सुप्रीम लीडर नियुक्त किया गया। उनके कार्यकाल में ईरान ने परमाणु कार्यक्रम को बहुत तेजी से बढ़ाया जिससे पश्चिमी देशों के साथ उनके रिश्ते खराब हुए। खामेनेई को एक बहुत ही सख्त और कट्टरपंथी छवि वाले नेता के रूप में पूरी दुनिया में हमेशा जाना जाता था।

पारिवारिक शोक और उत्तराधिकार

इजराइल हमलों में न केवल खामेनेई बल्कि उनकी बेटी, दामाद और उनके मासूम पोते की भी मौत हो गई है। ईरान में 40 दिनों के शोक की घोषणा की गई है और अब नए नेता के चयन की प्रक्रिया शुरू है। मोजतबा खामेनेई और हसन खुमैनी के नाम अगले सुप्रीम लीडर बनने की दौड़ में इस समय सबसे आगे चल रहे हैं।

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