

UK PM Keir Starmer Resignation: यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री और लेबर पार्टी के नेता कीर स्टार्मर ने देश के शीर्ष राजनीतिक पद से अचानक अपने इस्तीफे की घोषणा कर दी है। उनके इस अप्रत्याशित फैसले के बाद ब्रिटिश सरकार और लेबर पार्टी के भीतर नेतृत्व के नए संकट को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। बीते 10 सालों में अपना पद छोड़ने वाले वह ब्रिटेन के छठे प्रधानमंत्री बन गए हैं।
उन्होंने देश के नाम अपने संबोधन में बताया कि उन्होंने इस बारे में ब्रिटेन के राजा चार्ल्स तृतीय से बात कर ली है। कीर स्टार्मर के कार्यकाल के दौरान उठाए गए विभिन्न नीतिगत कदमों और राजनीतिक दबावों को इस बड़े फैसले की मुख्य वजह माना जा रहा है। अब वैश्विक नेताओं की नजरें लंदन पर टिकी हैं कि ब्रिटेन में इस राजनीतिक फेरबदल के बाद सत्ता की कमान किसके हाथों में सौंपी जाएगी।
नए नेता के चुने जाने तक कीर स्टार्मर कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में अपना काम करते रहेंगे। पार्टी के भीतर असंतोष गहराने के बाद 100 से ज्यादा लेबर सांसदों ने सार्वजनिक रूप से उनसे इस्तीफे की मांग की थी। मैनचेस्टर के पूर्व मेयर एंडी बर्नहम के सांसद बनने के बाद उन पर यह दबाव और ज्यादा बढ़ गया था। बर्नहम को ही अब लेबर पार्टी और देश के अगले प्रधानमंत्री की रेस में सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है।
कीर स्टार्मर पर कई बड़े विवादों के कारण पद छोड़ने का भारी राजनीतिक दबाव था। उन्होंने पीटर मैंडेलसन को अमेरिका में ब्रिटेन का राजदूत नियुक्त किया था जिनके यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन से संबंध थे। इसके अलावा टैक्स और सामाजिक कल्याण योजनाओं पर यू-टर्न लेने से भी उनकी छवि को भारी नुकसान पहुंचा। जुलाई 2024 में 174 सीटों के बड़े बहुमत से जीतने के बाद भी उन्हें बीच में ही अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ी।
मेकरफील्ड उपचुनाव में बड़ी जीत हासिल करने के बाद एंडी बर्नहम संसद पहुंच गए हैं और प्रधानमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे हैं। उन्होंने दक्षिणपंथी नेता नाइजेल फराज की पार्टी के उम्मीदवार को बुरी तरह हराया है। बर्नहम के अलावा वर्तमान वित्त मंत्री रेचल रीव्स और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री वेस स्ट्रीटिंग भी इस अहम दौड़ में शामिल हैं। बर्नहम ने देश की आर्थिक नीति बदलने और ट्रिकल-डाउन इकोनॉमिक्स को खत्म करने का वादा किया है।
कीर स्टार्मर के इस अचानक इस्तीफे का सबसे बड़ा असर भारत और ब्रिटेन के बीच होने वाले फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर पड़ सकता है। यह बहुप्रतीक्षित ऐतिहासिक व्यापार समझौता 15 जुलाई से पूरी तरह लागू होने वाला था। इस बड़े समझौते से ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था में 4.8 अरब पाउंड जुड़ने का पक्का अनुमान है। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में 25.5 अरब पाउंड की भारी बढ़ोतरी होने की भी उम्मीद है।
स्टार्मर ने कहा कि उनकी पार्टी पूछ रही थी कि क्या वह अगले चुनाव के लिए सही व्यक्ति हैं। उन्होंने इस सवाल को सम्मानपूर्वक स्वीकार किया और भावुक होकर अपने बच्चों को अपनी सबसे बड़ी खुशी बताया। अब लेबर पार्टी को जल्द ही अपना नया और मजबूत नेता चुनना होगा जो देश चला सके। विशेषज्ञों का मानना है कि राजनीतिक उथल-पुथल के बावजूद लेबर पार्टी लंबी अवधि में भारत के साथ हुए अहम समझौतों को आगे जरूर बढ़ाएगी।