

Karim Khan ICC Removed Over Sexual Misconduct Allegations By Assembly: ताजा खबरों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) के मुख्य अभियोजक करीम खान को उनके पद से हटा दिया गया है। गवर्निंग बॉडी की हालिया जांच में खान की यौन कदाचार और दुर्व्यवहार में संलिप्तता पाई गई है जिसके बाद यह बहुत बड़ी और सख्त कार्रवाई हुई है। मई 2025 में एक पूर्व महिला सहयोगी ने करीम खान पर यौन शोषण के साथ-साथ शारीरिक हमले के भी बहुत ही गंभीर आरोप लगाए थे। इस शर्मनाक घटना ने पूरी अंतरराष्ट्रीय न्यायिक व्यवस्था और अदालत की निष्पक्षता पर कई बड़े और गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
साल 2021 में आईसीसी के तीसरे अभियोजक के रूप में चुने गए करीम खान को पिछले ही महीने उनके पद से निलंबित कर दिया गया था। अब न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में उन्हें पूरी तरह से पद से हटाने का एक बेहद अहम और बड़ा प्रस्ताव सफलतापूर्वक पारित कर दिया गया है। इस कड़े फैसले से दुनिया भर में यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि कार्यस्थल पर किसी भी तरह के अनुचित व्यवहार को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संस्था अपने सभी कर्मचारियों को एक सुरक्षित, समावेशी और सम्मानजनक माहौल देने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
अदालत की निगरानी संस्था ने जून में अपनी गहन जांच के बाद यह पाया था कि करीम खान ने भारी कदाचार किया है। एक जूनियर आईसीसी कर्मचारी के साथ अनुचित यौन संबंध बनाकर उन्होंने अपने अहम कर्तव्य और पद की गरिमा का बहुत बड़ा उल्लंघन किया था। इसके साथ ही उन पर यह भी गंभीर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने शिकायतकर्ता कर्मचारी को अपनी शिकायत आगे बढ़ाने से रोकने की पूरी कोशिश की। इन सभी निष्कर्षों के बाद ही उन्हें पद से हटाने की यह सख्त और ऐतिहासिक प्रक्रिया शुरू की गई थी।
करीम खान को पद से हटाने का यह ऐतिहासिक फैसला न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में एक विशेष मतदान के जरिए लिया गया है। इस पूरी प्रक्रिया में आईसीसी के कुल 125 सदस्य देशों में से 82 देशों ने खान को हटाने के पक्ष में अपना निर्णायक वोट दिया। वहीं 13 देशों ने उनका समर्थन किया जबकि 15 देश इस मतदान प्रक्रिया से पूरी तरह से दूर रहे और उन्होंने हिस्सा नहीं लिया। इतने भारी बहुमत से प्रस्ताव पारित होना दर्शाता है कि सदस्य देश इस मामले को लेकर कितने ज्यादा गंभीर और सख्त थे।
विवादों में घिरे मुख्य अभियोजक करीम खान ने शुरुआत से ही अपने ऊपर लगे इन सभी गंभीर और शर्मनाक आरोपों से लगातार साफ इनकार किया है। उनके वकील ने भी स्पष्ट रूप से कहा है कि वे इस फैसले की वैधता और निष्पक्षता को सभी उपलब्ध कानूनी माध्यमों से कड़ी चुनौती जरूर देंगे।
फिलहाल यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो पाया है कि पद से हटाए जाने के बाद अब उनके पास कौन-कौन से कानूनी विकल्प मौजूद हैं। फिर भी आईसीसी ने साफ कर दिया है कि कर्मचारियों का सम्मान ही उनकी सबसे बड़ी और पहली प्राथमिकता है।