

नवभारत इंटरनेशनल डेस्क: सरकारी नौकरी को अब तक सबसे सुरक्षित करियर विकल्पों में गिना जाता रहा है। इसकी स्थिरता, नियमित वेतन, पेंशन और अन्य लाभों के कारण यह आम लोगों के बीच काफी पसंद किया जाता है। हालांकि, बदलते वैश्विक परिदृश्य के चलते अब सरकारी नौकरियों की स्थिरता पर भी संकट के बादल छा रहे हैं।
अमेरिका, चीन और हांगकांग जैसे देशों में सरकारी कर्मचारियों की नौकरियों में कटौती और वेतन संकट की खबरें यह दर्शाती हैं कि अब सरकारी क्षेत्र में भी स्थिरता की पूर्ण गारंटी नहीं रह गई है।
अमेरिका में सरकारी एजेंसियों में बड़े पैमाने पर छंटनी हो रही है। डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से सरकारी विभागों में हर दिन औसतन 3,200 कर्मचारी अपनी नौकरियां खो रहे हैं। यह संकेत देता है कि अमेरिकी सरकार अब सरकारी कर्मचारियों की संख्या को सीमित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
वहीं, सरकारी खर्चों में कटौती और निजीकरण को बढ़ावा देने की नीति के चलते कई सरकारी एजेंसियां या तो बंद हो रही हैं या उनमें कर्मचारियों की संख्या में भारी कमी की जा रही है।
चीन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेशन के बढ़ते उपयोग के कारण सरकारी नौकरियों में भारी कटौती हो रही है। कई सरकारी विभागों में कामकाज अब AI और मशीन लर्निंग के जरिए संचालित किए जा रहे हैं, जिससे कर्मचारियों की आवश्यकता घटती जा रही है। डिजिटलाइजेशन के इस विस्तार के चलते हजारों सरकारी कर्मचारियों की नौकरियां खत्म हो चुकी हैं। सरकार की इस नई कार्यप्रणाली से पारंपरिक सरकारी पदों की संख्या लगातार कम होती जा रही है।
इधर, हांगकांग की स्थिति दिनों-दिन गंभीर होती जा रही है। आर्थिक संकट इतना गहरा गया है कि सरकार अपने कर्मचारियों को वेतन देने में असमर्थ हो गई है। हालात और बिगड़ते हुए नज़र आ रहे हैं, क्योंकि सरकार ने 10,000 कर्मचारियों की छंटनी का आदेश भी जारी कर दिया है। इस संकट की मुख्य वजह वहां की आर्थिक मंदी और बढ़ता सरकारी कर्ज है, जिसके चलते सरकारी कर्मचारियों का भविष्य अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है।
तकनीकी प्रगति के चलते पारंपरिक सरकारी नौकरियों पर संकट गहराता जा रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक दफ्तरी (क्लेरिकल) नौकरियों में सबसे तेज गिरावट देखने को मिलेगी। अनुमान है कि डाक विभाग के कर्मचारियों की संख्या में 34% तक की कमी आ सकती है, जबकि बैंक टेलर और अन्य क्लेरिकल पदों पर 31% तक गिरावट हो सकती है।
इसके विपरीत, टेक्नोलॉजी और डिजिटलाइजेशन से जुड़े क्षेत्रों में रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, बिग डेटा विशेषज्ञों की मांग में 113% तक वृद्धि होगी, जबकि फिनटेक इंजीनियरों की संख्या में 93% तक बढ़ोतरी हो सकती है। इसी तरह, AI और मशीन लर्निंग विशेषज्ञों की मांग भी 82% तक बढ़ने की संभावना है।