

Strict US Iran Blockade: अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी को सख्त किए जाने के बाद लाल सागर और होर्मुज स्ट्रेट क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ गया है। रणनीतिक समुद्री मार्गों पर अमेरिकी नौसेना की निगरानी और कार्रवाई से व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। इससे वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति को लेकर भी चिंता बढ़ने लगी है।
इस बीच ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोहियों ने अमेरिकी कार्रवाई के विरोध में कई बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें दागी हैं। पूरे घटनाक्रम ने मध्य पूर्व में सैन्य तनाव बढ़ाने के साथ-साथ वैश्विक सप्लाई चेन और ऊर्जा बाजारों के लिए भी नई चुनौती खड़ी कर दी है।
अमेरिकी रक्षा सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ईरान के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी को लागू करने के लिए रणनीतिक जलमार्गों पर लगातार निगरानी और चेकिंग अभियान चला रहा है। अमेरिकी नौसैनिक जहाज संदिग्ध और नियमों का उल्लंघन करने वाले वाणिज्यिक जहाजों की जांच कर रहे हैं।
आधिकारिक सैन्य आंकड़ों के अनुसार, 2 सितंबर तक अमेरिकी नौसेना ने नियमों का उल्लंघन करने वाले 86 वाणिज्यिक जहाजों का मार्ग बदल दिया है। इसके अलावा तीन जहाजों को निष्क्रिय किया गया, जबकि दो जहाजों पर अमेरिकी सैनिकों ने सवार होकर गहन जांच की।
अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई के बीच यमन के हूती विद्रोहियों ने भी जवाबी हमला किया। हूती लड़ाकों ने पश्चिमी यमन से एक साथ 10 बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें लॉन्च कीं। इन हमलों में ताइज प्रांत के मोखा शहर और होदेइदाह प्रांत के अल-खोखा जिले को निशाना बनाया गया।
अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम ने अधिकांश मिसाइल हमलों को नाकाम करने का दावा किया है। हालांकि, लगातार हो रहे हमलों के कारण क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही और समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।
यमन में संघर्ष केवल मिसाइल हमलों तक सीमित नहीं है। हूती लड़ाकों ने ताइज के अल-कदहा-अल-बराह मार्ग पर भी बड़ा जमीनी हमला किया। हालांकि, यमनी सरकारी बलों ने इस हमले को नाकाम करने का दावा किया है।
वहीं, ईरान की पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी (PGSA) ने बुधवार को होर्मुज से गुजरने वाले 11 और जहाजों को ब्लैकलिस्ट कर दिया। इसके बाद नियमों का उल्लंघन करने के चलते ब्लैकलिस्ट किए गए जहाजों की कुल संख्या 56 हो गई है।
लाल सागर और होर्मुज क्षेत्र में बढ़ते तनाव का सीधा असर वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है। जहाजों को सुरक्षित रास्तों के लिए लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है, जिससे परिवहन और बीमा लागत बढ़ सकती है। अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो भारत समेत दुनिया के कई बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिका का लगभग पूरा नियंत्रण स्थापित हो चुका है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी चेतावनी दी है कि ईरान की मदद करने वाले देशों या पक्षों पर कड़े प्रतिबंध लगाए जाएंगे। ऐसे में Iran blockade और Red Sea conflict का असर आने वाले दिनों में वैश्विक ऊर्जा और व्यापार व्यवस्था पर और गहरा हो सकता है।