फिलिस्तीन के बाद अब जॉर्डन की बारी! इजरायल की नई नीति से अम्मान में हड़कंप, क्या टूटेगी 30 साल पुरानी संधि?

Israel Jordan Tensions: वेस्ट बैंक में इजरायल की नई जमीन रजिस्ट्री नीति ने जॉर्डन की चिंताएं बढ़ा दी हैं। अम्मान को डर है कि फिलिस्तीनियों को जबरन उसकी सीमा की ओर धकेला जा सकता है।
After Palestine, now it's Jordan's turn! Israel's new policy has caused a stir in Amman. Will the 30-year-old treaty be broken?
इजरायल की नई जमीन नीति से जॉर्डन की चिंताएं बढ़ी, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

West Bank Land Policy: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अब एक नया मोर्चा खुलता नजर आ रहा है। इजरायल द्वारा वेस्ट बैंक में लागू की गई नई जमीन नीति ने पड़ोसी देश जॉर्डन को गहरी चिंता में डाल दिया है। अम्मान के राजनीतिक और सुरक्षा हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या इजरायल अब फिलिस्तीनियों को धीरे-धीरे जॉर्डन की ओर धकेलने की अपनी पुरानी योजना पर काम कर रहा है।

इजरायल का मास्टरप्लान

हाल ही में इजरायली कैबिनेट ने वेस्ट बैंक की बड़ी जमीनों को आधिकारिक रूप से 'राज्य भूमि' के रूप में दर्ज करने का बड़ा फैसला लिया है। विशेष बात यह है कि अब यह पूरी प्रक्रिया सीधे इजरायल के न्याय मंत्रालय के अधीन होगी। इजरायल के वित्त मंत्री बेज़लेल स्मोट्रिच ने इस कदम को बस्तियों के विस्तार की दिशा में एक 'क्रांतिकारी कदम' बताया है। जॉर्डन को असली डर इस बात का है कि इजरायल के इस फैसले से पुराने उस्मानी और जॉर्डन काल के वे भूमि रिकॉर्ड कमजोर या अमान्य हो जाएंगे, जो अब तक फिलिस्तीनियों के संपत्ति अधिकारों की कानूनी ढाल रहे हैं।

'सॉफ्ट ट्रांसफर' की भयावह आशंका

अम्मान की सुरक्षा एजेंसियां केवल सैन्य आक्रमण से नहीं बल्कि एक 'सॉफ्ट ट्रांसफर' की स्थिति से डरी हुई हैं। इसका अर्थ है कि वेस्ट बैंक में हालात ऐसे बना दिए जाएं कि वहां रहना असंभव हो जाए। जेनिन और तुल्कारेम जैसे इलाकों में इजरायल की बढ़ती सैन्य कार्रवाई, शरणार्थी कैंपों पर दबाव और आर्थिक तंगी के कारण ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है कि फिलिस्तीनी आबादी खुद-ब-खुद जॉर्डन की सीमा की ओर पलायन करने पर मजबूर हो जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बड़ी संख्या में शरणार्थी सीमा की ओर बढ़ते हैं तो यह जॉर्डन की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन जाएगा।

शांति संधि पर मंडराते बादल

इजरायल और जॉर्डन के बीच 1994 में हुई 'वादी अरबा संधि' को इस क्षेत्र में शांति की आधारशिला माना जाता है। हालांकि, जॉर्डन में अब यह धारणा मजबूत हो रही है कि मौजूदा इजरायली सरकार इस समझौते की भावना का सम्मान नहीं कर रही है और वेस्ट बैंक पर स्थायी नियंत्रण चाहती है।

जॉर्डन ने भी अपनी रक्षा के लिए कमर कस ली है। रिपोर्ट्स के अनुसार, जॉर्डन ने करीब 35 साल बाद 'अनिवार्य सैन्य सेवा' कार्यक्रम को दोबारा शुरू किया है। इसके साथ ही, जरूरत पड़ने पर सीमावर्ती इलाकों को 'बंद सैन्य क्षेत्र' घोषित करने की भी तैयारी है ताकि किसी भी अनियंत्रित घुसपैठ या पलायन को रोका जा सके।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com