Troop Withdrawal: ट्रंप ने नेतन्याहू को दी बड़ी नसीहत, कहा सीरिया और लेबनान से सेना तुरंत हटाएं
Israel Troop Withdrawal: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू को सीरिया और लेबनान से सेना वापस बुलाने को कहा है। उनका मानना है कि इससे भारी तनाव काफी घटेगा।
- Written By: प्रिया सिंह
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू (सोर्स-सोशल मीडिया)
Trump Netanyahu Troop Withdrawal: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को फोन पर एक बहुत ही बड़ी और सख्त नसीहत दी है। ट्रंप ने नेतन्याहू से साफ शब्दों में कहा है कि वे सीरिया और लेबनान से अपनी सेनाओं को तुरंत वापस बुला लें। ट्रंप का ऐसा मानना है कि इजरायली सेना की इन क्षेत्रों में लगातार मौजूदगी से पूरे मध्य पूर्व में तनाव काफी बढ़ रहा है। दोनों देशों के बीच हुए इस अहम फोन कॉल के बाद कूटनीतिक गलियारों में अचानक से काफी ज्यादा हलचल तेज हो गई है।
दूसरी ओर इजरायल सरकार ने अपने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इन संवेदनशील क्षेत्रों में सेना की मौजूदगी को बहुत जरूरी बताया है। अमेरिका और इजरायल ने इससे पहले फरवरी में मिलकर ईरान पर एक बहुत ही बड़ा और सीधा सैन्य धावा पूरी तरह बोला था। लेकिन बाद में इजरायल का पूरा फोकस सीरिया और लेबनान के शहरों में बड़े हमले करने की ओर पूरी तरह से शिफ्ट हो गया था। अब ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि इजरायल को वहां से अपनी सेनाओं को पीछे हटाना शुरू करना ही होगा।
ट्रंप और सीरियाई राष्ट्रपति की मुलाकात
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शरा के बीच हाल ही में एक बहुत ही अहम बैठक सफलतापूर्वक हुई थी। दोनों ही विश्व नेताओं की यह महत्वपूर्ण मुलाकात तुर्की में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन के इतर एक विशेष सत्र के दौरान हुई थी। इस अहम बैठक के ठीक एक दिन बाद ही ट्रंप ने इजरायली पीएम नेतन्याहू को फोन करके यह बहुत ही कड़ी नसीहत दे डाली। अमेरिका चाहता है कि इजरायल सीरियाई क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए अपने कदम पीछे खींच ले।
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इजरायल और सीरिया के बीच समझौता
ट्रंप सरकार पिछले कई महीनों से लगातार इजरायल और सीरिया के बीच एक नया सुरक्षा समझौता कराने की पूरी भरपूर कोशिश कर रही है। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों का साफ कहना है कि प्रशासन अब इस अंतिम नतीजे पर पहुंच चुका है कि नेतन्याहू अभी राजी नहीं हैं। नेतन्याहू उन बड़ी कूटनीतिक रियायतों को देने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं हैं जो अमेरिका उनसे इस समय पूरी तरह से चाहता था। इन रियायतों में दिसंबर 2024 में असद शासन के पतन के बाद कब्जे में लिए गए सीरियाई क्षेत्रों से इजरायली सेना को वापस बुलाना शामिल है।
इजरायल का सुरक्षा को लेकर दावा
इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान और दक्षिणी सीरिया के बड़े हिस्सों पर अभी तक अपना बहुत कड़ा कब्जा पूरी तरह से किया हुआ है। इजरायल सरकार का यह बड़ा दावा है कि भविष्य में किसी भी बड़े हमले को रोकने के लिए वहां सेना की मौजूदगी बेहद जरूरी है। इजरायल सरकार के कुछ बड़े अधिकारी इन अहम इलाकों पर अपना अनिश्चित काल के लिए पूरा कड़ा कंट्रोल हर हाल में बनाए रखना चाहते हैं। यहां तक कि वे अधिकारी वहां नई यहूदी बस्तियां बसाने की भी बहुत ही जोरदार तरीके से अपनी वकालत कर रहे हैं।
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नेतन्याहू पर बढ़ा राजनीतिक दबाव
ट्रंप की इस नई और सख्त मांग ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर राजनीतिक दबाव को बहुत ही ज्यादा बढ़ा दिया है। दिलचस्प बात यह है कि ठीक तीन महीने बाद इजरायल में आम चुनाव होने वाले हैं जो नेतन्याहू के राजनीतिक अस्तित्व के लिए अहम हैं। ऐसे में नेतन्याहू के लिए सीरिया से सेना हटाने का कोई भी बड़ा कदम उठाना बहुत ही ज्यादा मुश्किल साबित होगा। वे लेबनान में पहले से तय समझौते से आगे बढ़कर सैनिकों को पीछे हटने के लिए कहने से भी फिलहाल बचते हुए नजर आएंगे।
