ब्रिटेन ने अरब सागर में परमाणु पनडुब्बी तैनात की (सोर्स- सोशल मीडिया)
UK Reacts Sharply After Diego Garcia Missile Attack: ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच तनाव अब बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है और हालात किसी बड़े युद्ध जैसे दिखाई दे रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुकाबिक, ईरान ने इजरायल पर कई घातक बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया है। इन हमलों ने इजरायल की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दी है, क्योंकि कहा जा रहा है कि एयर डिफेंस सिस्टम सभी मिसाइलों को रोकने में पूरी तरह सफल नहीं रहा।
खास तौर पर, ईरान ने इजरायल के महत्वपूर्ण परमाणु केंद्र डिमोना को निशाना बनाया, जिससे पूरे क्षेत्र में चिंता और डर का माहौल बन गया है। पश्चिम एशिया में बढ़ते इस तनाव के बीच ब्रिटेन ने भी अपनी सैन्य गतिविधियां तेज कर दी हैं।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन ने अपनी आधुनिक परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी HMS Anson को अरब सागर में तैनात किया है। यह पनडुब्बी टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों से लैस है और जरूरत पड़ने पर लंबी दूरी तक सटीक हमला करने में सक्षम है। माना जा रहा है कि अगर यह संघर्ष और बढ़ता है और अमेरिका की स्थिति कमजोर होती है, तो ब्रिटेन भी सीधे तौर पर इस युद्ध में शामिल हो सकता है।
🚨BREAKING: The UK sends a nuclear submarine to the Arabian Sea, armed for a strike on Iran ‘if conflict escalates,’ the Daily Mail reports. pic.twitter.com/PsJCY6O9JY — Saturn World News (@SaturnWorldNews) March 22, 2026
ब्रिटेन ने अमेरिका को अपने सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करने की अनुमति भी दे दी है। इन ठिकानों में RAF फेयरफोर्ड और डिएगो गार्सिया जैसे महत्वपूर्ण बेस शामिल हैं। इन जगहों से अमेरिकी सेना ईरान के उन मिसाइल ठिकानों पर हमला कर सकती है, जो इस क्षेत्र में तनाव को बढ़ा रहे हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए खतरा बन रहे हैं।
शुरुआत में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर इस तरह की सैन्य कार्रवाई को लेकर सावधान थे। उन्होंने कहा था कि किसी भी हमले से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि वह कानूनी रूप से सही हो। लेकिन बाद में, जब ईरान ने पश्चिम एशिया में ब्रिटेन के सहयोगी देशों पर हमले किए, तो उन्होंने अपना रुख बदल लिया और अमेरिका को समर्थन देने का फैसला किया।
रिपोर्ट्स के अनुसार, HMS Anson 6 मार्च को ऑस्ट्रेलिया के पर्थ शहर से रवाना हुई थी। यह पनडुब्बी हर 24 घंटे में सतह पर आकर लंदन स्थित मुख्यालय से संपर्क करती है। किसी भी हमले से पहले इसके कमांडर को ब्रिटिश प्रधानमंत्री से अनुमति लेनी होती है।
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इससे पहले ईरान ने हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया द्वीप को भी निशाना बनाया था। हालांकि कोई मिसाइल वहां नहीं गिरी, लेकिन इस घटना से यह संकेत मिलता है कि ईरान के पास 2000 किलोमीटर से अधिक दूरी तक मार करने वाली मिसाइल क्षमता मौजूद है, जो इस पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय है।