Explainer: 650B$ स्वाहा और हजारों मौतों के बाद हुई डील, जानें अमेरिका-ईरान युद्ध ने आपकी जेब पर कैसे डाला डाका

US-Iran War: एक महीने के युद्ध ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को 54.88 लाख करोड़ रुपये का जख्म दिया है। ईरान में 7300 मौतें और भारत के शेयर बाजार में 37 लाख करोड़ की गिरावट ने दुनिया को हिला कर रख दिया।
US-Iran War Global Economy Effect
अमेरिका-ईरान युद्ध का वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित (सोर्स- सोशल मीडिया)
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US-Iran War Global Economy Effect: पिछले एक महीने से चल रहे ईरान-अमेरिका-इजरायल संघर्ष ने केवल सीमित क्षेत्र तक ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को आर्थिक और मानवीय संकट के सामने ला खड़ा किया है। मिसाइल और ड्रोन हमलों से सैकड़ों लोग मारे गए, घायल हुए, और अरबों डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ। अब दोनों पक्षों ने सीज़फायर पर सहमति जताई है, लेकिन इससे पहले का संकट भयानक था।

विशेषज्ञों के मुताबिक, इस संघर्ष ने वैश्विक GDP को लगभग 54.88 लाख करोड़ रुपये तक नुकसान पहुंचाया। आइए जानते हैं कि इस इजरायल, अमेरिका और ईरान के युद्ध में किसे कितना नुकसान हुआ है।

ईरान में मानवीय और आर्थिक तबाही

इस युद्ध में सबसे ज्यादा तबाही ईरान ने देखी है। अमेरिकी और इजरायली हमलों से देश की अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचा बुरी तरह प्रभावित हुआ। अब तक 7,300 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं और 25,000 से अधिक घायल बताए जा रहे हैं। स्कूल, अस्पताल और ऐतिहासिक इमारतें खंडहर बन चुकी हैं। चैथम हाउस की रिपोर्ट चेतावनी देती है कि अगर संघर्ष जारी रहा, तो ईरान की GDP 10% से अधिक घट सकती है, जिससे देश कई दशक पीछे चला जाएगा। हालांकि, ईरान के लिए आर्थिक तबाही से बड़ी समस्या उसके वरिष्ठ नेताओं और टॉप कमांडरों का मारा जाना है।

अमेरिका और इजरायल को कितना हुआ नुकसान

युद्ध का आर्थिक बोझ केवल ईरान तक सीमित नहीं रहा। अमेरिका और इजरायल को भी भारी नुकसान झेलना पड़ा। CSIS की रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक अमेरिका ने इस युद्ध में 7.49 लाख करोड़ रुपये ($80.4 बिलियन) का नुकसान उठाया है। यदि संघर्ष लंबा चला और व्यापार तथा ऊर्जा आपूर्ति बाधित रही, तो कुल नुकसान $210 बिलियन (लगभग 19.2 लाख करोड़ रुपये) तक जा सकता है। इजरायल में अब तक सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि, इजरायल ने अपने नुकसान को लेकर कोई अधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया है, लेकिन मीडिया रिपोर्टों के अनुसार यहूदी देश को ईरान और हिजबुल्लाह के साथ युद्ध में लगभग $15 अरब (लगभग 1.45 लाख करोड़ रुपये) का आर्थिक नुकसान हुआ है।

खाड़ी देशों की GDP पर भारी गिरावट

संघर्ष की आग केवल ईरान तक ही सीमित नहीं रही। पड़ोसी अरब देशों को भी गंभीर नुकसान झेलना पड़ा।

  • कुवैत और कतर में युद्ध जारी रहने पर GDP 14% तक घट सकती है और पीने के पानी तथा LNG सुविधाओं को भारी खतरा है। 
  • सऊदी अरब और यूएई की GDP में क्रमशः 3% और 5% की गिरावट का अनुमान है। यूएई के शेयर बाजार को 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ।
  •  इराक में तेल उत्पादन में 70% तक गिरावट आई।
  •  लेबनान में 1,400 मौतें, 4,639 घायल और लगभग 10 लाख लोगों के विस्थापन की रिपोर्ट है, जबकि आर्थिक नुकसान लगभग $14 अरब हुआ। 
  • अन्य प्रभावित देशों में बहरीन, ओमान और जॉर्डन शामिल हैं, जहां जान-माल और बुनियादी ढांचे को नुकसान हुआ।

मिडिल ईस्ट जंग का भारत पर असर

मिडिल ईस्ट की जंग का भारत पर सीधा सैन्य असर नहीं पड़ा, लेकिन आर्थिक असर जबरदस्त है। शेयर बाजार में निवेशकों ने 37 लाख करोड़ रुपये खो दिए। पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ी, LPG की कमी और लंबी पंप लाइनें बन गईं। सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की, जिससे सालाना 1.5 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। क्रूड ऑयल का भाव फरवरी में $69 था, जो अप्रैल 2026 में $125.88 तक पहुंच गया।

ग्लोबल सप्लाई चेन बाधित

युद्ध ने वैश्विक सप्लाई चेन को बाधित कर दिया है, जिससे दुनिया 1973 के तेल संकट से भी कठिन दौर में पहुंच गई है। पाकिस्तान में स्कूल बंद और 'वर्क फ्रॉम होम' लागू किया गया। श्रीलंका में तेल बचाने के लिए हर बुधवार सरकारी छुट्टी रखी गई। फिलीपींस में राष्ट्रीय ऊर्जा आपातकाल घोषित किया गया। चीन ने ईंधन निर्यात पर पूर्ण रोक लगा दी।

महंगाई और उद्योग पर असर

तेल की कीमतें बढ़ने के साथ उद्योगों पर भी दबाव बढ़ा। ट्रांसपोर्टेशन महंगा हुआ और मैन्युफैक्चरिंग लागत में बढ़ोतरी हुई। उर्वरक, प्लास्टिक, सिंथेटिक रबर और औद्योगिक रसायनों की कीमतें बढ़ीं। गुजरात के टेक्सटाइल हब में इनपुट कॉस्ट 50% तक बढ़ गई। पॉलिएस्टर की कीमत 15%, एक्रिलिक एसिड की कीमत 30% बढ़ी।

कुल मिलाकर, यह युद्ध केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रहा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और आम जीवन पर भारी संकट बनकर उभरा। इसका असर दुनिया पर लंबे समय तक देखने को मिल सकता है। 

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