मिडिल ईस्ट की जंग में नया मोड़! ईरान के खिलाफ युद्ध के मैदान में उतरेगा ये मुस्लिम देश, अमेरिका की करेगा मदद

US-Iran Conflict: ईरान-अमेरिका युद्ध में अब यूएई की एंट्री! स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को खुलवाने के लिए अबू धाबी ने कसी कमर। यूएनएससी में प्रस्ताव लाने की तैयारी और अमेरिका के साथ सैन्य गठबंधन की अपील।
UAE Military Intervention Iran
ईरान के खिलाफ युद्ध में शामिल होगा यूएई (सोर्स- सोशल मीडिया)
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UAE Military Intervention Iran: ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच डोनाल्ड ट्रंप का एक बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने कहा कि यह युद्ध 2 से 3 हफ्तों में समाप्त हो सकता है। हालांकि, जमीनी हालात इतने जटिल और अस्थिर हैं कि ऐसा होना फिलहाल मुश्किल नजर आ रहा है। इसके चलते माना जा रहा है कि अमेरिका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बिना खुलवाए ही युद्ध से पीछे हटने की तैयारी में है।

इसी बीच, अमेरिका का समर्थन कर रहे संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने अब इस संघर्ष में सीधे शामिल होने पर विचार शुरू कर दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यूएई अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ मिलकर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को फिर से खोलने के लिए सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। यह एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल गुजरता है।

UNSC में प्रस्ताव लाने की कोशिश

ईरान द्वारा यूएई और अन्य खाड़ी देशों पर लगातार हमलों के बाद अब अबू धाबी का रुख बदल रहा है। यदि यूएई इस युद्ध में उतरता है, तो वह ऐसा करने वाला पहला खाड़ी देश होगा। जानकारी के अनुसार, यूएई संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में एक प्रस्ताव लाने की कोशिश कर रहा है, जिससे ईरान के खिलाफ कार्रवाई को मंजूरी मिल सके। साथ ही, उसने अमेरिका, यूरोप और एशियाई देशों से एक गठबंधन बनाने की अपील की है, ताकि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को सुरक्षित किया जा सके। हालांकि, रूस और चीन इस प्रस्ताव का विरोध कर सकते हैं।

ईरान के खिलाफ खाड़ी देशों का सख्त रुख

सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देश भी ईरान के प्रति कड़ा रुख अपना रहे हैं, हालांकि उन्होंने अभी तक सीधे सैन्य हस्तक्षेप नहीं किया है। वहीं बहरीन, जहां अमेरिकी नौसेना का फिफ्थ फ्लीट तैनात है, इस प्रस्ताव का समर्थन कर रहा है और इस पर जल्द वोटिंग हो सकती है। यूएई के युद्ध में शामिल होने से अमेरिका को रणनीतिक बढ़त मिल सकती है।

युद्ध में कैसे मदद करेगा यूएई?

विशेषज्ञों के अनुसार, यूएई के पास मजबूत सैन्य क्षमता, जेबेल अली पोर्ट जैसे बड़े बंदरगाह और रणनीतिक लोकेशन है, जो अमेरिका के नेतृत्व वाले अभियान में अहम भूमिका निभा सकते हैं। अगर यूएई खुलकर इस युद्ध में शामिल होता है, तो इससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है।

इसके अलावा, यूएई अपने सर्विलांस ड्रोन, अमेरिकी निर्मित हथियारों और शॉर्ट-रेंज मिसाइलों की सप्लाई के जरिए इजरायल को भी समर्थन दे सकता है। यूएई का यह कदम ट्रंप के लिए बड़ी रणनीतिक बढ़त साबित हो सकता है, खासकर ऐसे समय में जब कई नाटो देश उनसे दूरी बनाए हुए हैं।

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