

Iran US Conflict Peace Talks Islamabad: ईरान और अमेरिका के बीच पिछले सात हफ्तों से जारी भीषण संघर्ष अब एक निर्णायक और बेहद नाजुक मोड़ पर खड़ा है। नई दिल्ली में ईरान के राजदूत मोहम्मद फताली ने स्पष्ट कर दिया है कि तेहरान शांति के लिए पूरी तरह तैयार है लेकिन अब सब कुछ अमेरिका के अगले कदम पर निर्भर करता है। उन्होंने एक विशेष साक्षात्कार में चेतावनी दी कि यदि उन पर हमला किया गया तो ईरानी जनता और देश अपनी रक्षा करने के लिए पूरी तरह सक्षम और तैयार हैं।
इस्लामाबाद में होने वाली महत्वपूर्ण वार्ता से पहले मोहम्मद फताली ने कहा कि ईरान कूटनीति के माध्यम से समाधान चाहता है। उन्होंने कहा कि हम सभी परिणामों के लिए खुले हैं हालांकि हमारी पहली प्राथमिकता शांति है। शांति कैसे आएगी? यह दूसरे पक्ष पर निर्भर है। राजदूत ने अमेरिका की इस सोच पर भी सवाल उठाया कि युद्ध दो-तीन दिनों में खत्म हो जाएगा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि युद्ध के 42 दिनों के बाद अब वे बातचीत की मेज पर बैठना चाहते हैं।
इस संकट को सुलझाने के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने वाले हैं, जिसमें विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और सलाहकार जेरेड कुशनर शामिल होंगे। ईरानी पक्ष की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ और विदेश मंत्री अब्बास अरागची के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, तेहरान ने अभी तक अपनी भागीदारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है लेकिन सूत्रों का कहना है कि यदि जेडी वेंस मौजूद रहते हैं तो गालिबफ वार्ता में शामिल हो सकते हैं।
ईरानी दूत फताली ने वाशिंगटन पर ईरानी बुनियादी ढांचे और नागरिकों को जानबूझकर निशाना बनाने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि अमेरिकी हमलों में ईरान की सड़कों, रेलवे और स्वास्थ्य केंद्रों को भारी नुकसान पहुंचाया गया है।
यह युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ था और वर्तमान में लागू एक नाजुक संघर्षविराम बुधवार को समाप्त होने वाला है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सख्त चेतावनी दी है कि यदि कोई समझौता नहीं होता है तो ईरान के प्रमुख बुनियादी ढांचे को फिर से निशाना बनाया जा सकता है।
संकट के इस कठिन दौर में ईरान ने भारत सरकार और यहां के लोगों द्वारा दिखाए गए समर्थन और एकजुटता के लिए आभार व्यक्त किया है। फताली ने कहा कि भारतीयों ने अपनी सहानुभूति दिखाई है। उन्हें पता है कि हम अपनी गरिमा के लिए लड़ रहे हैं।
फरवरी के अंत में संघर्ष शुरू होने के बाद से भारत लगातार ईरान को मानवीय सहायता, विशेष रूप से चिकित्सा आपूर्ति भेज रहा है। चिकित्सा आपूर्ति की पहली खेप मार्च के मध्य में डिलीवर की गई थी। जिसके बाद कई और खेप भेजी जा चुकी हैं।