ईरान-अमेरिका के बीच फिर बढ़ी टेंशन! अब 'होर्मुज' पर सेना तैनात करेगा तेहरान, ट्रंप ने दी बड़ी चेतावनी

Iran US Conflict: ईरान ने होर्मुज का नियंत्रण सेना को सौंपने और 'दुश्मन जहाजों' को रोकने की तैयारी कर ली है। डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शांति वार्ता रद्द करने से वैश्विक ऊर्जा संकट का खतरा बढ़ गया है।
Tensions Escalate Again Between Iran and the US; Tehran to Deploy Troops to the Strait of Hormuz—Trump Issues Major Warning
सांकेतिक एआई फोटो
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Strait Of Hormuz Iran US Conflict:  पश्चिम एशिया में युद्ध के बादल एक बार फिर गहरे होते जा रहे हैं। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्ग Strait of Hormuz को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है।

ईरान ने अब इस रणनीतिक जलमार्ग की सुरक्षा और प्रबंधन की जिम्मेदारी पूरी तरह से अपनी सेना को सौंपने का मन बना लिया है। इस फैसले ने न केवल अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है क्योंकि होर्मुज की घेराबंदी का सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ेगा।

सेना को कमान और नया कानून

ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने सरकारी टेलीविजन पर जानकारी दी कि ईरान सरकार एक नया कानून लाने की तैयारी कर रही है। इस कानून के तहत होर्मुज स्ट्रेट का पूरा प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था ईरानी सेना के हाथों में होगी। अजीजी के अनुसार, ईरानी सेना पहले से ही इस क्षेत्र में सक्रिय रही है लेकिन अब इसे कानूनी रूप से और अधिक शक्तियां दी जा रही हैं ताकि 'दुश्मन जहाजों' की आवाजाही पर प्रभावी ढंग से रोक लगाई जा सके। इसके अलावा, प्रस्तावित कानून में यह प्रावधान भी शामिल है कि इस मार्ग से होने वाली सभी कमाई अब ईरानी रियाल में होगी।

अमेरिका की कड़ी प्रतिक्रिया

ईरान के इस आक्रामक रुख के बीच अमेरिका ने भी अपनी स्थिति साफ कर दी है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया है कि वे मिडिल ईस्ट की किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इस तनाव का सबसे बड़ा असर राजनयिक प्रयासों पर पड़ा है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि उनके दूत अब 'इस्लामाबाद टॉक्स' के लिए नहीं जाएंगे। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि हालांकि बातचीत के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं, लेकिन अब पहल ईरान को ही करनी होगी।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराता खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज में जरा सा भी तनाव अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार को तबाह कर सकता है। यह मार्ग दुनिया का वह 'चोक पॉइंट' है जहां से खाड़ी देशों का अधिकांश कच्चा तेल दुनिया भर में भेजा जाता है। यदि ईरानी सेना ने यहां नाकेबंदी की तो तेल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि होगी, जिससे एशिया, यूरोप और अमेरिका समेत पूरी दुनिया एक गंभीर ऊर्जा संकट की चपेट में आ जाएगी। शांति वार्ता के रुकने और सैन्य गतिविधियों के बढ़ने से निवेशकों और वैश्विक बाजारों में भी भारी घबराहट देखी जा रही है।

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