ईरान की ट्रंप को दोटूक चेतावनी; अमेरिकी तेल कंपनियों को बना देंगे 'राख का ढेर', होर्मुज भी रहेगा बंद

Iran US War: ईरान-इजराइल युद्ध के 15वें दिन ईरान ने अमेरिका को बड़ी धमकी दी है। नए सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई ने अमेरिकी तेल संयंत्रों को नष्ट करने और होर्मुज स्ट्रेट बंद रखने का ऐलान किया है।
Iran Issues Blunt Warning to Trump: We Will Turn US Oil Companies into 'Piles of Ash,' and the Strait of Hormuz Will Remain Closed.
ईरान ने ट्रंप को दी दोटूक चेतावनी, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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Iran Threatens US Oil Plants: मध्य-पूर्व में जारी भीषण संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ पर पहुंच गया है। इजराइल और अमेरिका के साथ चल रही 15 दिनों की भीषण जंग के बीच ईरान ने सीधे तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चेतावनी दी है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि यदि उसके तेल ढांचे पर हमले जारी रहे, तो वह क्षेत्र में मौजूद अमेरिका से जुड़ी तमाम तेल सुविधाओं और ऊर्जा संयंत्रों को 'राख के ढेर' में तब्दील कर देगा।

मुज्तबा खामेनेई का 'प्रतिशोध' संकल्प

ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई ने युद्ध की कमान संभालते ही कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। उन्होंने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि वह अपने पिता सैय्यद अयातुल्ला अली खामेनेई की शहादत का बदला लेंगे। इस प्रतिशोध की दिशा में उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य  की नाकाबंदी को जारी रखने का फैसला किया है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, इस नाकाबंदी और जारी हमलों के कारण दुनिया के पांचवें हिस्से (20% से अधिक) का तेल व्यापार ठप हो गया है।

वैश्विक तेल संकट और रिकॉर्ड कीमतें

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ती इस तनातनी ने दुनिया भर में ऊर्जा का भारी संकट पैदा कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह युद्ध और खिंचता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है। विशेष रूप से भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों पर इसका गहरा और प्रतिकूल असर पड़ने की संभावना है।

ट्रंप की रणनीति और खर्ग आइलैंड पर हमला

यह धमकी ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी सेना ने ईरान के खर्ग आइलैंड पर भीषण हमला किया है। राष्ट्रपति ट्रंप के कड़े रुख के बाद ईरान ने भी अपनी सैन्य रणनीति बदल दी है और अब वह सीधे अमेरिकी आर्थिक हितों (तेल संयंत्रों) को निशाना बनाने की बात कर रहा है। युद्ध के 14वें दिन मुज्तबा खामेनेई द्वारा बाजी पलटने के दावों ने पश्चिमी देशों की चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल, पूरा मध्य-पूर्व एक बारूद के ढेर पर बैठा है और तेल की बढ़ती कीमतें आम जनता की जेब पर भारी पड़ रही हैं।

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