अमेरिका का गला अभी और चोक करेगा ईरान...होर्मुज के बाद इस रास्ते को भी बंद करने की तैयारी, मचेगा हाहाकार

US-Iran War: होर्मुज के बाद ईरान बाब अल-मांदेब स्ट्रेट को भी बंद कर सकता है। इससे वैश्विक चिंता बढ़ी गई है, इससे 30% तेल-गैस सप्लाई और 12% समुद्री व्यापार को सीधा खतरा पैदा हो गया है।
Iran Warns Close Strait of Bab-el-Mandeb
ईरान ने बाब-अल-मांदेब स्ट्रेट को बंद करने की धमकी दी (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Iran Warns Close Strait of Bab-el-Mandeb: ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध के बाद जिस समुद्री रास्ते ने सबसे ज्यादा वैश्विक ध्यान खींचा है, वह है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज। इसकी अहमियत इसलिए है क्योंकि दुनिया के करीब 20% कच्चे तेल और भारी मात्रा में गैस की सप्लाई इसी रास्ते से होती है। भारत समेत एशिया के कई देशों की ऊर्जा जरूरतें भी काफी हद तक इसी मार्ग पर निर्भर हैं।

फिलहाल ईरान ने इस स्ट्रेट पर सख्त निगरानी बढ़ा दी है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता गहरा गई है। लेकिन अब खतरा सिर्फ होर्मुज तक सीमित नहीं है। ईरान ने संकेत दिए हैं कि वह एक और महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते बाब अल मांदेब स्ट्रेट पर दबाव बना सकता है। यदि उस पर सैन्य दबाव या हमले जारी रहते हैं, तो ईरान इस मार्ग को भी बाधित करने की कोशिश कर सकता है।

क्यों अहम है बाब-अल-मांदेब स्ट्रेट?

ईरान की सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) से जुड़े सूत्रों का दावा है कि उसके पास इस क्षेत्र में खतरा पैदा करने की पूरी क्षमता है। बाब-अल-मांदेब एक संकरा लेकिन बेहद अहम समुद्री रास्ता है, जो लाल सागर को अदन की खाड़ी और आगे अरब सागर से जोड़ता है। यह यमन, जिबूती और इरिट्रिया के बीच स्थित है। इसके अलावा दुनिया के कुल समुद्री व्यापार का लगभग 12% हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है, और स्वेज नहर की ओर जाने वाले जहाजों के लिए यह एक जीवनरेखा जैसा है। अगर होर्मुज के साथ-साथ यह रास्ता भी प्रभावित होता है, तो वैश्विक तेल और गैस सप्लाई के लगभग 30% हिस्से पर असर पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में जहाजों को लंबा रास्ता अपनाते हुए केप ऑफ गुड होप के रास्ते जाना पड़ेगा, जिससे समय और लागत दोनों बढ़ेंगे।

हूथी विद्रोही करते रहते हैं हमले

इस क्षेत्र में पहले से ही खतरे मौजूद हैं। यमन में सक्रिय हूथी विद्रोहियों द्वारा जहाजों पर हमले किए जाते रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन हमलों के कारण जहाजों की सुरक्षा पर अरबों डॉलर खर्च हो चुके हैं और कई जहाज डूब भी चुके हैं।

कुल मिलाकर, अगर ईरान इन दोनों अहम समुद्री मार्गों पर दबाव बनाता है, तो इसका असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार और अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

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