रेजा पहलवी ने ट्रंप को भेजा ‘इमरजेंसी’ मैसेज, क्या ईरान में होगी राजशाही की वापसी?

Reza Pahlavi News: ईरान में आर्थिक तंगी और पाबंदियों के खिलाफ उग्र प्रदर्शन जारी हैं। निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने डोनाल्ड ट्रंप से मदद मांगी है जिससे राजशाही की वापसी की सुगबुगाहट तेज हो गई।
The return of monarchy in Iran! Reza Pahlavi sent an 'emergency' message to Trump, what are the dynamics at play against Khamenei?
डोनाल्ड ट्रम्प और रेजा पहलवी, (डिजाइन फोटो)
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Iran Protest Latest News In Hindi: ईरान में वर्तमान इस्लामिक सरकार के खिलाफ आक्रोश चरम पर है। देश की खस्ताहाल अर्थव्यवस्था, आसमान छूती महंगाई और लोगों की आजादी पर लगी पाबंदियों के कारण लाखों लोग सड़कों पर उतर आए हैं।

इस बीच, ईरान के आखिरी शाह के बेटे और निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी अचानक सक्रिय हो गए हैं जिससे देश में सत्ता परिवर्तन और राजशाही की वापसी की अटकलें तेज हो गई हैं।

पहलवी का ट्रंप को 'इमरजेंसी' मैसेज

पेरिस से जारी एक बयान में रेजा पहलवी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को 'फ्री वर्ल्ड का लीडर' बताते हुए एक 'इमरजेंसी' मैसेज भेजा है। उन्होंने ट्रंप से ईरानी लोगों का साथ देने की अपील की और यूरोपीय नेताओं से भी अपनी चुप्पी तोड़ने को कहा है। पहलवी ने आरोप लगाया कि ईरानी सरकार ने प्रदर्शनों को दबाने के लिए इंटरनेट, लैंडलाइन और सैटेलाइट सिग्नल तक जाम कर दिए हैं।

सेना से की पाला बदलने की अपील

रेजा पहलवी ने ईरान की सेना और सुरक्षाबलों से सीधा संवाद करते हुए उनसे पूछा है कि वे 'इतिहास के किस तरफ' खड़े होना चाहते हैं। उन्होंने सैनिकों से अपील की कि वे निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर गोली न चलाएं, बल्कि उनकी रक्षा करें। गौरतलब है कि पहलवी ने 6 महीने पहले सैनिकों से संपर्क के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाया था, जहां हजारों सुरक्षाकर्मी पहले ही पंजीकरण करा चुके हैं।

डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी

ईरान के हालातों पर नजर रख रहे डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि यदि ईरानी सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर जुल्म किए, तो उसे अमेरिका का भीषण हमला झेलना पड़ेगा। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया है।

राजशाही की यादें और भविष्य की राह

ईरान में प्रदर्शनकारी अब 'तानाशाह की मौत' के साथ-साथ 'पहलवी वापस आएंगे' और 'शाह अमर रहें' जैसे नारे लगा रहे हैं। 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से निर्वासन में रह रहे रेजा पहलवी खुद को 'रेजा शाह द्वितीय' कहते हैं और पिछले 4 दशकों से लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता की वकालत कर रहे हैं।

हालांकि, वे यह भी कहते हैं कि ईरान का भविष्य और शासन का स्वरूप (राजशाही या रिपब्लिक) वहां की जनता ही तय करेगी। वर्तमान में ईरान की गिरती मुद्रा 'रियाल' और बढ़ती बेरोजगारी ने लोगों को पुराने दौर की राजशाही को याद करने पर मजबूर कर दिया है।

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