ईरान की नई मिसाइल शक्ति: सॉलिड फ्यूल मिसाइलों से इजराइल पर भीषण प्रहार

Iran Solid Fuel Missile Attack On Israel: ईरान ने इजराइल के खिलाफ सॉलिड फ्यूल मिसाइलों का इस्तेमाल किया है, जो बेहद तेज और खतरनाक हैं। यह तकनीक युद्ध के मैदान में पासा पलटने की क्षमता रखती है।
Iran's New Missile Power: Fierce Strikes on Israel Using Solid-Fuel Technology 
ईरान की सॉलिड फ्यूल मिसाइल (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Iran Israel Solid Fuel Strikes: मिडिल ईस्ट में जारी भीषण जंग अब एक ऐसे खतरनाक चरण में पहुंच गई है जहां उन्नत सैन्य तकनीक का बोलबाला है। ईरान ने इजराइल के उत्तरी हिस्सों को निशाना बनाने के लिए अपनी आधुनिक 'खैबर-शेकन' सॉलिड-फ्यूल मिसाइलों का इस्तेमाल किया है। ये मिसाइलें न केवल तेज हैं बल्कि इन्हें दागने से पहले किसी लंबी तैयारी की जरूरत भी नहीं होती है। पूरी दुनिया इस समय ईरान की इस बढ़ती सैन्य ताकत और इजराइल के साथ बढ़ते तनाव को लेकर बेहद चिंतित है।

क्या है सॉलिड फ्यूल तकनीक?

सॉलिड फ्यूल से चलने वाली मिसाइलें दुश्मन के लिए सबसे बड़ी चुनौती मानी जाती हैं क्योंकि इन्हें पकड़ना मुश्किल होता है। इन मिसाइलों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन्हें लॉन्च करने से ठीक पहले ईंधन भरने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। ठोस ईंधन के कारण इन मिसाइलों को लंबे समय तक सुरक्षित स्टोर करना और कहीं भी ले जाना काफी आसान होता है।

युद्ध में क्यों हैं ये खतरनाक?

इन मिसाइलों की रफ्तार इतनी तेज होती है कि दुश्मन के रडार और डिफेंस सिस्टम को इन्हें रोकने का समय नहीं मिलता। चूंकि ये मिनटों में लॉन्च की जा सकती हैं, इसलिए इनका इस्तेमाल अचानक हमले करने के लिए युद्ध क्षेत्र में खूब होता है। ठोस ईंधन के इस्तेमाल से मिसाइल का ढांचा मजबूत रहता है और यह भारी पेलोड के साथ लंबी दूरी तय कर सकती है।

ईरान का 'खैबर-शेकन' प्रहार

ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने ऑपरेशन 'ट्रू प्रॉमिस-4' के तहत इजराइल पर अपनी 27वीं लहर के हमले शुरू किए हैं। एयरोस्पेस डिवीजन ने विशेष रूप से उत्तरी इजराइल को नई खैबर-शेकन सॉलिड-फ्यूल मिसाइलों से निशाना बनाकर अपनी ताकत दिखाई है। इस हमले ने अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है क्योंकि सॉलिड फ्यूल तकनीक ईरान की मारक क्षमता को बहुत बढ़ा देती है।

इतिहास और वैश्विक पहुंच

सॉलिड फ्यूल मिसाइल तकनीक का सबसे पहला उपयोग 1970 के दशक में सोवियत संघ द्वारा सफलतापूर्वक किया गया था। बाद के वर्षों में फ्रांस, चीन और उत्तर कोरिया जैसे देशों ने भी इस खतरनाक तकनीक को विकसित और इस्तेमाल किया है। अब ईरान भी इस खास क्लब में शामिल होकर इजराइल और अमेरिका के खिलाफ अपनी सामरिक स्थिति मजबूत कर चुका है।

भविष्य की अनिश्चितता

मिडिल ईस्ट में तनाव के आज नौ दिन पूरे हो चुके हैं लेकिन शांति की कोई भी उम्मीद फिलहाल नजर नहीं आ रही है। इजराइली पीएम नेतन्याहू ने कसम खाई है कि वे इस युद्ध को जारी रखेंगे और ईरानी शासन को पूरी तरह उखाड़ फेंकेंगे। सॉलिड फ्यूल मिसाइलों का यह बढ़ता उपयोग भविष्य में जंग को और भी भीषण और अनियंत्रित बना सकता है जो चिंताजनक है।

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