कल मांगी माफी...आज कुवैत के इंटरनेशनल एयरपोर्ट दाग दिए मिसाइल, क्या करना चाहता है ईरान?

Iran Attack on Gulf Countries: ईरान के ड्रोन और मिसाइल हमलों से खाड़ी देशों में तनाव बढ़ गया है। कुवैत, सऊदी अरब और बहरीन ने हमलों की पुष्टि की, जबकि कई ड्रोन को मार गिराया गया।
Iran Attack Kuwait International Airport
ईरान ने कुवैत के एयरपोर्ट पर हमला किया (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Iran Attack Kuwait International Airport: ईरान द्वारा खाड़ी क्षेत्र के कई देशों पर किए गए ड्रोन और मिसाइल हमलों ने रविवार सुबह तक इलाके में तनाव को और बढ़ा दिया। कुवैत, सऊदी अरब और बहरीन समेत कई देशों ने इन हमलों की पुष्टि की है और सोशल मीडिया के माध्यम से भी अपनी स्थिति साझा की है।

कुवैत की सेना के अनुसार, रविवार सुबह दुश्मन के ड्रोन ने कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट के फ्यूल स्टोरेज को निशाना बनाया। हालांकि सुरक्षा बलों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए स्थिति को नियंत्रण में करने की कोशिश की। इस हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं।

सऊदी अरब पर भी हुआ ड्रोन अटैक

सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने भी बताया कि उनके देश को ड्रोन हमलों का सामना करना पड़ा। मंत्रालय के मुताबिक, रविवार सुबह तक कम से कम 21 ड्रोन को इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया गया। सऊदी रक्षा प्रणाली ने समय रहते इन ड्रोन को गिरा दिया, जिससे बड़े नुकसान को टाला जा सका।

वहीं बहरीन में हालात अधिक गंभीर बताए जा रहे हैं। किंग फहद कॉजवे के पार स्थित मिना सलमान सीपोर्ट के एक हिस्से में आग लग गई। बहरीन के गृह मंत्रालय ने इस घटना को ईरान द्वारा किया गया हमला बताया है। आग बुझाने के लिए इमरजेंसी सेवाएं लगातार काम कर रही हैं और इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

खाड़ी देशों पर जारी है ईरानी हमले

बताया जा रहा है कि ईरान ने बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे खाड़ी देशों को निशाना बनाया। ईरान लंबे समय से इन देशों पर अमेरिका का साथ देने का आरोप लगाता रहा है। इन देशों में कई अमेरिकी सैन्य अड्डे भी मौजूद हैं, जिन्हें ईरान पहले भी निशाना बना चुका है।

एक दिन पहले ही मांगी थी माफी

इन हमलों का समय इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि एक दिन पहले ही ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने खाड़ी देशों से माफी मांगी थी। उन्होंने पिछले सप्ताह अमेरिकी ठिकानों पर हुए ड्रोन और मिसाइल हमलों को लेकर खेद जताया था और कहा था कि जब तक ईरान पर हमला नहीं होगा, तब तक वह अपने पड़ोसी देशों को निशाना नहीं बनाएगा।

हालांकि उनके इस बयान को लेकर ईरान के भीतर ही विवाद खड़ा हो गया। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स के कुछ अधिकारियों ने इसे अव्यावहारिक बताया। बाद में राष्ट्रपति कार्यालय ने सफाई देते हुए कहा कि उनका आशय यह था कि यदि क्षेत्रीय देश अमेरिका के हमलों में ईरान का साथ नहीं देंगे, तो ईरान भी उन पर हमला नहीं करेगा।

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